केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से हम आत्मनिर्भर भारत प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा देगी। यह वैज्ञानिक सोच पर आधारित है और इसमें भारतीय जीवन मूल्य भी समाहित हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू होने से भारत दुनिया में ज्ञान की एक 'महाशक्ति' के रूप में उभरेगा और शिक्षा के क्षेत्र में एक वैश्विक ब्रांड बनेगा ।
शिक्षा मंत्री ने सोमवार को नई शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही । उन्होंने कहा कि देश में पहली शिक्षा नीति 1968 में बनी थी। इसके बाद दूसरी शिक्षा नीति 1986 में आई थी और अब करीब 34 साल बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आई है। जिससे शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन होगा और यह शिक्षा नीति भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाएगी तथा पूरी दुनिया में भारत शिक्षा के क्षेत्र में एक ब्रांड के रूप में उभरेगा।
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उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति डिजिटल और दूरवर्ती होगी। हम उच्च शिक्षा में 50 फीसदी दाखिले का लक्ष्य पार करेंगे और 3.50 करोड़ छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर देंगे। शिक्षा मंत्री निशंक ने कहा कि भारत के चुनिंदा विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों के भी विदेशों में कैंपस खुलेंगे और दुनिया के 100 चुने हुए शैक्षणिक संस्थानों को भी भारत में प्रवेश दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए भारत स्वच्छ भारत मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को भी हासिल करेगा।
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शिक्षा मंत्री निशंक ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किसी भी प्रदेश पर कोई भाषा थोपी नहीं गई है। बल्कि इसमें लचीलापन और स्थायित्व है। शिक्षा मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यह बात कही है। इस सम्मेलन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संबोधित किया।