संसद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कोई चर्चा नहीं हुई
छात्रों को संबोधित करते हुए राज्यसभा सदस्य झा ने आरोप लगाया कि संसद में नीति पर कोई चर्चा नहीं हुई। आरजेडी सांसद ने कहा कि दस्तावेज को संसद में पेश नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा क्या यह अपने आप में बेईमानी नहीं है? नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कोई चर्चा नहीं हुई है। सांसद ने कहा कि जब हमने शून्यकाल में मामले को उठाने की कोशिश की, तो इसे स्वीकार नहीं किया गया, और हमें बताया गया कि यह है एक नीतिगत निर्णय और चर्चा की कोई आवश्यकता नहीं है।
शिक्षा नीति निम्न और मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ
उन्होंने आरोप लगाया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति न केवल निम्न वर्ग बल्कि मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ है। झा ने कहा कि हम यहां एकजुटता के साथ कह सकते हैं कि शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के आगे बढ़ने को रोकने के लिए एक सचेत प्रयास किया गया है। झा ने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति में सामाजिक न्याय और सकारात्मक कार्रवाई का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि यह संविधान की आत्मा और प्रस्तावना के खिलाफ है। दस्तावेज ने स्कॉलरशिप और लोन के बीच के अंतर को खत्म कर दिया है।
कोचिंग उद्योग को ही फलने-फूलने में मदद मिलेगी
भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि नई नीति से कोचिंग उद्योग को ही फलने-फूलने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा का निजीकरण, केंद्रीकरण और भगवाकरण होगा। सभा को संबोधित करते हुए हिंदू कॉलेज के प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि शिक्षा नीति छात्रों और शिक्षकों दोनों को प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि इस नीति के कारण प्रोफेसरों को भी नुकसान होगा। हम सभी को इसके लिए लड़ना चाहिए। हमें इस नीति का विरोध करने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए।