NEHU Pro-Vice Chancellor: एनईएचयू के चार प्रमुख निकायों ने शिलांग परिसर में प्रशासनिक गतिरोध और संस्थान के सामान्य संचालन को बहाल करने में विफलता के चलते प्रो-वाइस चांसलर से इस्तीफे की मांग की। निकायों ने कहा कि पिछले आश्वासनों के अनुरूप कार्रवाई नहीं करने से विश्वविद्यालय के कार्यों में रुकावट आ रही है और छात्रों एवं स्टाफ के हितों पर असर पड़ रहा है।
NEHU: नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU) के चार प्रमुख निकायों ने शिलांग परिसर के प्रो-वाइस चांसलर से इस्तीफा देने की मांग की है। इसका कारण "प्रशासनिक गतिरोध" और संस्थान के सामान्य संचालन को बहाल करने में विफलता बताई गई है।
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सोमवार रात यहां जारी एक संयुक्त विज्ञप्ति में, एनईएचयू छात्र संघ (एनईएचयूएसयू), एनईएचयू शिक्षक संघ (एनईएचयूटीए), एनईएचयू गैर-शिक्षण कर्मचारी संघ (एनईएचयूएनएसए) और खासी छात्र संघ (केएसयू) एनईएचयू इकाई ने कहा कि प्रो वाइस चांसलर एस उमडोर कार्यकारी परिषद के सदस्यों की उपस्थिति में केंद्रीय मंत्रालय के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए आश्वासनों के अनुसार कार्य करने में असमर्थ रहे हैं या उन्हें कार्य करने की अनुमति नहीं दी गई है।
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प्रशासनिक संकट और नेतृत्व की कमी के चलते विश्वविद्यालय में अनिश्चितता बढ़ी
इन संस्थाओं ने कहा कि ये आश्वासन विश्वविद्यालय में स्थिरता, पारदर्शिता और सामान्य स्थिति बहाल करने के उद्देश्य से दिए गए थे, लेकिन इन पर अमल करने में लगातार असमर्थता ने अनिश्चितता को बढ़ा दिया है और छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच विश्वास को कम कर दिया है।
उन्होंने रजिस्ट्रार (कार्यवाहक) और वित्त अधिकारी (कार्यवाहक) के इस्तीफे पर भी चिंता व्यक्त की, जो कथित तौर पर कुलपति (अनुपस्थिति में) प्रोफेसर पी.एस. शुक्ला के अनुचित दबाव के कारण हुआ था, और कहा कि इन घटनाक्रमों ने प्रशासनिक संकट को और बढ़ा दिया है।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि कथित कुप्रबंधन और अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से प्रोफेसर शुक्ला एक साल से अधिक समय से शिलांग परिसर से दूर रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय प्रभावी नेतृत्व के बिना रह गया है।
नेतृत्व संकट और लंबित जांच ने विश्वविद्यालय की कार्यक्षमता पर डाला असर
इसमें आगे बताया गया कि हालांकि केंद्र ने कुलपति के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए अधिकारियों को नियुक्त किया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे संस्थान के भीतर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
बयान में कहा गया है, "वर्तमान में, एनईएचयू पूरी तरह से प्रशासनिक गतिरोध का सामना कर रहा है, जिसमें कोई नियमित कुलपति, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी और परीक्षा नियंत्रक नहीं हैं, जिसके कारण पूरी तरह से संस्थागत अक्षमता उत्पन्न हो गई है और शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।"
यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया गया है, जिसमें शिलांग के सांसद रिकी सिंगकॉन ने हाल ही में एनईएचयू में लंबे समय से चल रहे नेतृत्व संकट को लेकर संसद में केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की है।
विश्वविद्यालय हित में नेतृत्व परिवर्तन की अपील
इन चारों संस्थाओं ने कहा कि आश्वासनों को कायम रखने और प्रभावी कामकाज सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रो वाइस चांसलर के कार्यालय की है, और मौजूदा परिस्थितियों में इस पद पर बने रहना विश्वविद्यालय के हित में नहीं है।
उन्होंने इस वर्ष जून में नियुक्त किए गए प्रो वाइस चांसलर से संस्थागत मानदंडों के अनुरूप वैकल्पिक व्यवस्था की अनुमति देने के लिए अपना इस्तीफा देने का आग्रह किया, यह दावा करते हुए कि यह अपील एनईएचयू में विश्वास, प्रशासनिक स्थिरता और लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल करने के हित में की गई थी।