राधाकृष्णन कमेटी के सुझावों पर SC की नजर
मेहता ने कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के सुझाव पैनल के सामने रखे गए थे, जिसने पूर्व ISRO चेयरमैन K राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पिछली कमेटी के सदस्यों के साथ भी विचार-विमर्श किया था। बेंच ने डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के जॉइंट सेक्रेटरी, जो नीलेकणी पैनल की मदद कर रहे हैं, से कहा कि वे अब तक उठाए गए कदमों के बारे में कोर्ट में हलफनामा (affidavit) दाखिल करें।
बेंच ने मेहता से कहा कि इस मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि सरकार को नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) कराने की पूरी प्रक्रिया को संस्थागत (institutionalise) बनाने पर विचार करना चाहिए। शिक्षा विभाग ने कहा है कि एक नया, अपग्रेडेड सिस्टम बनाया गया है।
मेहता ने कहा, "स्ट्रक्चर को स्थायी बनाने का काम पक्का कर लिया गया है। हालांकि, अभी ह्यूमन रिसोर्स (स्टाफ) की व्यवस्था आंशिक रूप से ही हो पाई है।"
वेबसाइट पर अपलोड होगा हलफनामा
बेंच ने कहा कि राधाकृष्णन कमेटी ने भी स्ट्रक्चरल सुधारों के बारे में कुछ सुझाव दिए थे, लेकिन समस्या उन सुझावों को लागू करने की है। मेहता ने बेंच को भरोसा दिलाया कि राधाकृष्णन कमेटी के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के सभी सुझावों पर नीलेकणी पैनल विचार कर रहा है।
मेहता ने बेंच से कहा, "यह सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हर जरूरी मदद दी जाएगी।"
बेंच ने निर्देश दिया कि NTA की ओर से दाखिल हलफनामा उसकी वेबसाइट पर अपलोड किया जाए, ताकि लोग अपने सुझाव दे सकें। बेंच ने केंद्र से एक नोडल वकील नियुक्त करने को भी कहा।