बेंगलुरु: गेट के बाहर बिलखते रहे छात्र
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सामने आए दृश्यों में देखा जा सकता है कि तय समय से कुछ ही मिनट देरी से पहुंचे छात्र परीक्षा केंद्र के अंदर जाने के लिए सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ते रहे। कुछ छात्र बंद लोहे के गेट को पकड़कर रोते हुए देखे गए, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए उन्हें एंट्री नहीं दी गई। अभ्यर्थी गेट के ऊपर से या नीचे से अंदर घुसने की नाकाम कोशिश करते भी नजर आए।
भोपाल: एक्सीडेंट के कारण हुई देर, नहीं मिली एंट्री
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद भावुक करने वाला मामला सामने आया। यहां दो छात्रों को मामूली देरी के कारण केंद्र में प्रवेश देने से साफ मना कर दिया गया।
एक छात्र के चाचा, आमिर कादरी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "मैं अपने भतीजे को परीक्षा दिलाने यहां लाया था। केंद्र पर आते समय रास्ते में हमारा एक्सीडेंट हो गया, जिसके कारण मेरे भतीजे का प्राथमिक उपचार कराना पड़ा और हमें थोड़ी देरी हो गई। अब जब हम यहां पहुंचे हैं, तो हमें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि परीक्षा शुरू हो चुकी है और अब किसी भी कीमत पर प्रवेश देना संभव नहीं है।"
दिल्ली: समय पर पहुंच गए थे, फिर भी एंट्री नहीं मिली
देश की राजधानी दिल्ली में भी कुछ अभ्यर्थी देर से परीक्षा केंद्र पहुंचने के चलते केंद्र में प्रवेश नहीं पा सके। एक छात्रा ने तो दावा किया कि वह समय पर बहुंच गई थी, इसके बाद भी प्रवेश नहीं मिला। छात्रा ने कहा, "हम दोपहर 1:30 बजे ही केंद्र पर पहुंच गए थे, लेकिन उन्होंने केंद्र का गेट खोलने से साफ इनकार कर दिया।"
गेट पर सर पटकता रहा पिता, नहीं मिली एंट्री
एक अन्य मामला जिसने सबका ध्यान आकर्षिक किया है, वह है केंद्र के गेट पर सर पटकते, बिलखते पिता और उसकी बेटी का। सोशल मीडिया पर काफी शेयर की जा रही एक वीडियो में दोनों एग्जाम सेंटर के बाहर रोते-बिलखते, प्रार्थना करते दिख रहे हैं। यहां तक कि पिता ने केंद्र के गेट पर अपना सिर तक दे मारा। लेकिन कथित रूप से एनटीए के नियमों के चलते दोपहर 01:30 बजे एग्जाम सेंटर का गेट बंद कर दिया गया था। वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत शेयर किया जा रहा है।
छात्रा का नाम रागिनी विश्वकर्मा बताया जा रहा है। 18 साल की रागिनी महीनों से डॉक्टर बनने के सपने के साथ पढ़ाई कर रही थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह एक दिन सफेद कोट पहनकर कार्डियोलॉजिस्ट के तौर पर लोगों की जान बचाना चाहती थीं, खासकर उन लोगों की जिन्हें दिल की बीमारी का खतरा था। लेकिन रविवार दोपहर को उनका यह सपना टूटता हुआ नजर आया - तैयारी की कमी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि वह अपने परीक्षा केंद्र पर कुछ मिनट देर से पहुंचीं।
परीक्षार्थियों को लेनी चाहिए सीख
उपरोक्त घटनाओं के दृश्यों को देखकर किसी भी परीक्षा के परीक्षार्थी को यह सीख लेनी चाहिए कि एग्जाम शुरू होने से उचित समय पहले एग्जाम सेंटर पहुंचना चाहिए। परीक्षा के समय से लगभग 1 या 2 घंटा पहले ही केंद्र पहुंच जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की विपरीत परिस्थिति में परीक्षा ना छूटने पाए।