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NEET UG 2021: फिजिक्स पेपर के हिंदी अनुवाद मामले में लेक्चरर ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, एनटीए पर उठाए सवाल

सार

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2021 में फिजिक्स पेपर के हिंदी संस्करण में पूछे गए एक प्रश्न के मामले में एक सेवानिवृत्त फिजिक्स लेक्चरर ने पीएम नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा है। उन्होंने एनटीए पर परीक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
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NEET UG 2021 - फोटो : Social Media
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विस्तार
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राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2021 में फिजिक्स पेपर में पूछे गए एक सवाल के हिंदी अनुवाद में कथित त्रुटि का मामला सामने आया था। अब इस मामले को लेकर फिजिक्स के सेवानिवृत्त लेक्चरर अजय सिंह बनठिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर

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राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में दावा किया है कि नीट यूजी परीक्षा 2021 के फिजिक्स पेपर का प्रश्न गलत हिंदी में अनुवादित था। इससे हजारों छात्रों के भविष्य दांव पर पहुंच चुका है।

गलत तरीके से प्रश्न को तैयार करने का लगाया आरोप

बनठिया ने आरोप लगाया कि एनटीए ने 'अल्टरनेटिंग करंट' पर प्रश्न को गलत तरीके से तैयार करके हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के साथ अन्याय किया है। इसकी परीक्षा 9 सितंबर, 2021 को हुई थी। जबकि प्रश्न के अंग्रेजी संस्करण में 'एम्पलीट्यूड ऑफ करंट' शब्द लिखा गया था, हिंदी संस्करण में इसे केवल 'धारा' (करंट) के रूप में तैयार किया गया था और 'एम्पलीट्यूड' शब्द को हटा दिया था। इसने छात्रों को यह समझ में आया कि उन्हें 'रूट मीन स्क्वेयर वैल्यू ऑफ करंट' को हल करना है।


2 लाख हिंदी भाषी उम्मीदवारों पर असर का दावा

इस बीच, कोटा में हिंदी भाषा के उम्मीदवारों ने प्रश्न के हिंदी संस्करण के अनुसमर्थन की मांग करते हुए नीट यूजी 2021 हिंदी मध्यम परीक्षार्थी संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। छात्रों के अनुसार, त्रुटि के लिए उन्हें पांच अंक दिए जाएं। इस तरह की बेहद प्रतियोगिता पूर्ण परीक्षा में वह उनके लिए  महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। छात्रों का दावा है कि प्रश्न को अनुचित तरीके से तैयार किया गया था। इससे दो लाख हिंदी भाषा के माध्यम से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को नुकसान हुआ है। यह सभी छात्र कई सरकारी कॉलेजों में प्रवेश से चूक जाएंगे।

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उत्तर कुंजी में सुधार की मांग ठुकराई

वहीं, पिछले महीने ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन शीट जारी होने की गई थी। छात्रों ने एनटीए से उत्तर कुंजी में सुधार की मांग करते हुए शिकायत की थी। एजेंसी ने इसको नहीं माना। हालांकि, छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने 30 नवंबर को एनटीए द्वारा "धोखाधड़ी वाले हलफनामे" के आधार पर मामले को खारिज कर दिया।


शिक्षकों ने हलफनामे में प्रस्तुत तथ्यों पर उठाए सवाल

कोटा के कोचिंग सेंटरों में फिजिक्स पढ़ाने वाले कई शिक्षकों ने आरोप लगाया कि एनटीए के संयुक्त निदेशक बिनोद कुमार साहू द्वारा हलफनामे में प्रस्तुत 'तथ्य' एनसीईआरटी (पृष्ठ संख्या 236,251,264) और एचसी वर्मा की फिजिक्स के कॉन्सेप्ट की पुस्तक  (खंड-द्वितीय, पृष्ठ संख्या 318) जैसे मानकों के खिलाफ थे। एचसी वर्मा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के सेवानिवृत्त फिजिक्स के प्रोफेसर हैं। फिजिक्स विषय में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


छात्रों की मांग का किया समर्थन

एक मशहूर कोचिंग संस्थान के फिजिक्स के विशेषज्ञ ब्रजेश माहेश्वरी ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया और कहा कि इन सभी छात्रों को न्याय मिले, मैं इनके साथ खड़ा हूं। उन्होंने कहा कि हिंदी और अंग्रेजी संस्करण में प्रश्न का अर्थ अलग-अलग है और इसलिए उनके अलग-अलग उत्तर होने चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि इस प्रश्न का कई अन्य भाषाओं में अनुवाद किया गया था, लेकिन प्रश्न के केवल हिंदी संस्करण में ' 'एम्पलीट्यूड' शब्द को हटा दिया गया था। 

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