सुप्रीम कोर्ट ने नीट-पीजी में 1456 सीटों के खाली रहने पर नाराजगी जताते हुए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि ऐसा करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए आयोजित स्ट्रे वेकेंट राउंड के बाद बची सीटों के लिए उम्मीदवारों को विशेष स्ट्रे राउंड काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति देने की मांग की गई है।
याचिका उन डॉक्टरों द्वारा दायर की गई है जो नीट-पीजी 2021 में शामिल हुए थे और ऑल इंडिया कोटा (एआईक्यू) काउंसलिंग के राउंड 1 व 2 और स्टेट कोटा काउंसलिंग में हिस्सा लिया था। इसके बाद वे ऑल इंडिया मॉप अप और स्टेट मॉप अप राउंड में भी शामिल हुए थे।
सीटों को बढ़ाने से बढ़ जाती भ्रष्टाचार की संभावना
पीठ ने कहा कि काउंसिलिंग के बीच में आप सीटों को क्यों जोड़ रहे हैं? एक कट ऑफ होना चाहिए कि कितनी सीटों पर प्रवेश दिया जाना है। सीटों को बढ़ाने से भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ जाती है। इसके बाद एमसीसी के वकील ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) के उपलब्ध नहीं होने की बात कही और सभी परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने के लिए एक दिन का समय मांगा।
nपीठ ने वकील को 24 घंटे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई बृहस्पतिवार के लिए टाल दी। साथ ही पीठ ने कहा, ये मेडिकल छात्रों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला हैं। केंद्र सरकार को किसी एक एएसजी द्वारा नहीं चलाया जाता है।
सॉफ्टवेयर के बंद होने से नहीं कराया जा सकता काउंसलिंग का एक और राउंड : डीजीएचएस
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसने नीट-पीजी 21 के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग के चार राउंड कराए थे और सॉफ्टवेयर बंद होने के चलते वह काउंसलिंग का विशेष स्ट्रे राउंड कराकर 1456 खाली सीटों को नहीं भर सकता है। डीजीएचएस ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की मांग काफी देरी से है क्योंकि यह आगामी नीट-पीजी 22 के लिए काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया को बाधित करेगी। दो अकादमिक सत्रों के लिए काउंसलिंग के साथ नहीं चलाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक चार राउंड कराए थे।