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SC में केंद्र का हलफनामा: डॉक्टरों की योग्यता तय नहीं करती NEET PG परीक्षा, मरीजों की सुरक्षा पर दिया ये तर्क

Mon, 23 Feb 2026 03:53 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

NEET PG 2025: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नीट पीजी न्यूनतम क्लिनिकल क्षमता तय नहीं करता, बल्कि सीमित पीजी सीटों के आवंटन के लिए मेरिट सूची बनाता है। खाली सीटों को भरने के लिए कटऑफ घटाया गया है और इससे शैक्षणिक मानकों से कोई समझौता नहीं हुआ।
 
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NEET PG 2026 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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NEET PG 2025: नीट-पीजी 2025 के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम किए जाने के फैसले का बचाव करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि नीट पीजी न्यूनतम क्लिनिकल क्षमता का प्रमाणन नहीं करता, बल्कि सीमित स्नातकोत्तर सीटों के आवंटन के लिए मेरिट सूची तैयार करने का माध्यम है। न्यूनतम योग्यता एमबीबीएस डिग्री से ही स्थापित हो जाती है।

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नीट पीजी क्षमता नहीं, मेरिट तय करता है

केंद्र द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि नीट पीजी स्कोर सापेक्ष प्रदर्शन और परीक्षा की संरचना पर आधारित होता है। इसे किसी उम्मीदवार की क्लिनिकल अक्षमता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी अभ्यर्थी लाइसेंस प्राप्त एमबीबीएस डॉक्टर हैं और स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने के पात्र हैं।

मरीज सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर क्या जवाब दिया?

रोगी सुरक्षा को लेकर उठाई गई चिंताओं को 'भ्रामक' बताते हुए हलफनामे में कहा गया कि:

पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण तीन वर्ष का संरचित कार्यक्रम है।
प्रशिक्षण के दौरान उम्मीदवार वरिष्ठ संकाय और विशेषज्ञों की निगरानी में कार्य करते हैं।
अंतिम क्षमता का आकलन एमडी/एमएस परीक्षा में होता है, जहां सिद्धांत और प्रैक्टिकल दोनों में अलग-अलग न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य हैं।

कितनी सीटें थीं खाली?

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन ने अनुमानित रिक्त सीटों की बड़ी संख्या को देखते हुए कटऑफ घटाने का निर्णय लिया। हलफनामे के अनुसार:
 
  • शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लगभग 70,000 पीजी सीटें उपलब्ध थीं।
  • 2,24,029 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
  • ऑल इंडिया कोटा की 31,742 सीटों में से दूसरे राउंड के बाद 9,621 सीटें खाली रहीं।
  • इनमें से 5,213 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों (AIQ और DNB सहित) में थीं।

कटऑफ घटाने से अतिरिक्त 1,00,054 उम्मीदवार तीसरे राउंड के लिए पात्र हुए, जिससे कुल पात्र अभ्यर्थियों की संख्या 2,28,170 हो गई। तीसरे राउंड के बाद केवल 2,988 सीटें रिक्त रहीं।

पहले भी घटी है कटऑफ

केंद्र ने कहा कि 2017 में नीट पीजी शुरू होने के बाद से विशेष परिस्थितियों में पर्सेंटाइल में कमी की जाती रही है। वर्ष 2023 में भी सभी श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल शून्य तक किया गया था, ताकि सीटें खाली न रहें।
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सरकार कहना यह नीतिगत मामला, न्यायिक दखल सीमित

सरकार ने अदालत से कहा कि यह नीतिगत निर्णय है और जब तक यह स्पष्ट रूप से मनमाना या असंवैधानिक न हो, तब तक न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित होता है।

हलफनामे में यह भी कहा गया कि पीजी सीटों पर भारी सार्वजनिक निवेश होता है। इन्हें खाली छोड़ना संसाधनों और प्रशिक्षण क्षमता की बर्बादी होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ेगा।

सरकार ने अंत में कहा कि पर्सेंटाइल में कमी एक 'अनुपातिक प्रशासनिक कदम' है, जो सीटों की बर्बादी रोकने और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सीट आवंटन अब भी मेरिट और उम्मीदवारों की वरीयता के आधार पर ही किया जाता है, इसलिए शैक्षणिक मानकों से कोई समझौता नहीं हुआ है।
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