कहां आ रही है समस्या?
नीट काउंसलिंग की प्रक्रिया के दौरान कई छात्र ऐसे भी होते हैं, जो राज्य कोटा और अखिल भारतीय कोटा दोनों ही स्तर प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं। नीट एआईक्यू (अखिल भारतीय कोटा) के लिए पहले राउंड के परिणाम तो आ गए हैं लेकिन दूसके राउंड की प्रक्रिया शेष है। ऐसे में अगर छात्र राज्य कोटा में अपनी सीट को आरक्षित कर के बॉण्ड जमा कर देते हैं तो वह एआईक्यू की काउंसलिंग में भाग नहीं ले पाएंगे। सरकार के इसी कदम ने छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
क्या कहा गया है आदेश में?
इस सत्र के नियम के अनुसार छात्र पहले राउंड की काउंसलिंग के आखिरी दिन तक अपनी सीट से फ्री एग्जिट ले सकते हैं। इसके बाद के राउंड में उन्हें 30 लाख का बॉण्ड जमा करना होगा। जबकि एआईक्यू सीटों पर राउंड-2 काउंसलिंग अभी बाकी है। एमसीसी के नए नियमानुसार इस सत्र से एआईक्यू काउंसलिंग में रिक्त सीटों को राज्यों के भी पास नहीं भेजा जाएगा। छात्र इसलिए मांग कर रहे हैं कि बॉण्ड दूसरे राउंड की काउंसलिग के बाद जमा करवाया जाए।
300 छात्रों के प्रवेश पर खतरा
छात्रों की मांग के अनुसार अगर बॉण्ड जमा करने की तारीखों में बदलाव नहीं किए जाते हैं तो मध्यप्रदेश के करीब 300 छात्र मेडिकल में प्रवेश से वंचित रह जाएंगे। इससे पहले तक राज्य के छात्रों के पास एमसीसी की एआईक्यू सीटों पर काउंसलिंग में भाग लेने के दो मौके होते थे, यह अब एक रह गया है। ज्यादातर छात्र मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। इस कारण वह केवल एक अखिल भारतीय कोटा की सीट के लिए 30 लाख रुपये का प्रबंध नहीं कर सकते, भले ही उन्हें प्रवेश उनके मेरिट पर मिल रहा हो।
अन्य राज्यों में क्या है प्रावधान
ज्यादातर राज्यों में बॉण्ड जमा कराने की प्रक्रिया काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद तय की गई है। कई राज्यों में बॉण्ड की रकम मध्यप्रदेश के मुकाबले कम है। वहीं, कई राज्य ऐसे हैं, जहां बॉण्ड जमा कराने का भी प्रावधान नहीं है। सीट छोड़ने के समय छात्रों से केवल पंजीयन राशि ली जाती है। ऐसे में मध्यप्रदेश के छात्रों के सामने ही ऐसा संकट आ गया है।