नीट रिपीट होने पर क्या करें और अगर नीट दोबारा नहीं होता है तो सही समय पर निर्णय कैसे लें। ताकि आपका एक साल खराब न हो। पूरी जानकारी जानें यहां
24 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने 5 मई को नीट यूजी परीक्षा 2024 दी थी। जिसके बाद 4 जून 2024 को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने रिजल्ट जारी किया। जिसमें 13 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। ग्रेस मार्क्स प्रकरण के बाद उन 1563 अभ्यर्थियों की परीक्षा दोबारा कराई गई। जिसमें 800 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। बाकी अभ्यर्थियों का बिना ग्रेस मार्क्स के रिजल्ट और जिन्होंने परीक्षा में भाग लिया उनका नया रिजल्ट एनटीए ने 30 जून को जारी किया। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है जहां 8 जुलाई को सुनवाई होनी है। लेकिन देश में जगह जगह प्रदर्शन, सोशल मीडिया पर रोष और नारेबाजी को देखते हुए कई अभ्यर्थी असमंजस में हैं। कि क्या दोबारा नीट परीक्षा होगी। अगर होती तो क्या उनके इतने मार्क्स आ पाएंगे। या उनका साल खराब हो जाएगा। ऐसे में एक्सपर्ट की राय ये है कि 92% से ज़्यादा छात्रों के लिए NTA में हुई अनियमितता के कारण भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि NEET 2024 में 42% से ज्यादा अयोग्य छात्र सिर्फ इसलिए NEET परीक्षा को दोबारा कराने की मांग पर अड़े हुए हैं ताकि वह नीट को पास करने का एक और मौका पा सकें। बाकी बचे 58 प्रतिशत छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक छात्रों को 500 से कम अंक मिले हैं। और शायद उनके पास सरकारी कॉलेजों में दाखिले का कोई चांस नहीं है और निजी कॉलेजों की फीस भरने का बजट उनके पास नहीं है। देश में भले नीट दोबारा हो जाए (जिसके आसार नजर नहीं आ रहे) लेकिन ये वो छात्र नहीं हैं जिन्हें भारत में सरकारी सीट मिल सकेगी। ऐसे छात्रों को विदेश से एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा या होम्योपैथी जैसे चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने की ओर कदम बढ़ाने चाहिए।
नीट एग्जाम के बाद यदि आप सफल हो गए हैं तो आपको अपनी नीट रैंक पता होगी। नीट एग्जाम अगर दोबारा हो भी जाता है तो कट ऑफ तकरीबन वही रहेगी जो अभी है। क्योंकि ग्रेस मार्क्स वाले छात्रों का री एग्जाम हो चुका है। 8 राज्यों के 4.75 लाख से अधिक नीट उम्मीदवारों में 2023 में केवल 12810 उम्मीदवारों को सरकारी मेडिकल सीटें दी गईं। अब ये नीचे बनी सारणी में देख सकते हैं। इस कटऑफ से जो बाहर हो रहे हैं उन्हें आत्मविश्वास से भारत के अंदर ही एमबीबीएस के अलावा अन्य क्षेत्रों में अपने कॅरिअर की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। अगर डॉक्टर बनने का ही सपना है तो ऐसे अभ्यर्थियों को विदेश से एमबीबीएस के विकल्प तलाशने चाहिए। विदेश की टॉप रैंक यूनिवर्सिटी में आवेदन कर वहां अपनी एमबीबीएस सीट बुक करनी चाहिए। हालांकि विदेश जाने वाले अधिकांश अभ्यर्थी फिलहाल 8 जुलाई को जारी होने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी बहुत कुछ बदलने वाला नहीं है।
एमबीबीएस कॅरिअर प्लानिंग टोल फ्री नंबर 18005710202
भारत में अगर कोचिंग संस्थानों की बात की जाए तो भारत में तकरीबन 7800 करोड़ रुपये का बिजनेस कोचिंग इंस्टीट्यूट करते हैं। ऐसे में अगर दोबारा नीट एग्जाम होता है तो जाहिर है कमजोर छात्र कोचिंग का सहारा लेकर इस बार नीट को क्लीयर करने की कोशिश करेंगे। इससे कोचिंग इंस्टीट्यूट के रिवेन्यू में बढ़त होगी। वह पुराने कोचिंग छात्र व असफल छात्रों का एक नया बैच बनाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि उनको सरकारी मेडिकल सीट का लालच देकर फिर से कोचिंग का पैसा वसूला जा सके। यही कारण है कि देश के कई कोचिंग इंस्टीट्यूट भी नीट को रिपीट करने की मांग कर रहे हैं। जबकि नीट परीक्षा 2024 और उसके नतीजे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8 जुलाई को नतीजा सुनाने के लिए पर्याप्त हैं।
सरकारी मेडिकल सीट नहीं मिलने की स्थिति में, निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस का बजट नहीं होने की स्थिति में आपका साल खराब हो जाएगा। लेकिन हम आपको प्लान बी के बारे में बता करे हैं। अगर निजी कॉलेजों में एमबीबीएस बजट(70-80 लाख) आपके पास नहीं है तो विदेश की कई टॉप यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जो 20 से 30 लाख में युवाओं को एमबीबीएस डिग्री दे रहीं हैं। युवाओं को विदेश की इन यूनिवर्सिटीज को चुनकर अपना साल बर्बाद होने से बचाना चाहिए। इसमें सफलता मोक्ष कॅरिअर काउंसलर आपकी पूरी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा अगर नीट रिपीट भी होता है तो सफलता मोक्ष का फ्री गारंटीड क्वालिफाइंग बैच आप ज्वाइन कर सकते हैं। जिसके जरिये विदेश की टॉप यूनिवर्सिटी में आपको एमबीबीएस सीट मिल जाएगी। आप पिछले 3 वर्षों के कट ऑफ, भारत के निजी व सरकारी मेडिकल कॉलेजों समेत डीम्ड विश्वविद्यालयों की ट्यूशन फीस आदि जांचने के लिए मोक्ष कॅरिअर प्लानर एप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
वर्ष 2024 से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग(एनएमसी) ने एमएमजीई के साथ साथ नीट पीजी की जगह नेशनल एग्जिट टेस्ट (NExT) की शुरूआत की है। जो भारत और विदेश में मेडिकल छात्रों के लिए लागू लाइसेंसिंग व PG प्रवेश परीक्षा मानी जाएगी। इसका मतलब साफ है कि अब भारत में और विदेश के MBBS में कोई अंतर नहीं है। ऐसे में विदेश से एमबीबीएस का विकल्प चुनना घाटे का सौदा नहीं है।
1-ऊपर दी गई 2023 की कट ऑफ रैंक प्रदान करने वाली तालिका देखें और अपनी रैंक से मिलान करें। अगर आपको लगता है कि आप कट ऑफ रैंक के 10% के भीतर हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के 8 जुलाई के फैसले तक प्रतीक्षा करें।
2-अगर आपका स्कोर 500 से कम है और MBBS के पूरे कोर्स के लिए आपका बजट 40 लाख रुपये से कम है, तो अन्य विकल्पों की तलाश शुरू करें।
3-अगर आपका सपना विशेषज्ञ (MD स्तर) बनना है, तो इंटीग्रेटेड कोर्स चुनें। आप विदेशों में जॉर्जिया को चुनना चाहते हैं तो जॉर्जिया की टॉप रैंक यूनिवर्सिटी TSMU अथवा यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के इंटीग्रेटेड अमेरिकी प्रोग्राम ही चुनें। जो आपको यूएस से एमडी के लिए मददगार होंगे।
4-अगर आप रूस से एमबीबीएस करना चाहते हैं तो ऐसा शहर चुनें जो राजधानी मॉस्को के करीब हो, जैसे कि ओरेल मेडिकल यूनिवर्सिटी।
5-कोशिश करके ऐसी यूनिवर्सिटी चुनें जो आपको भारत के लाइसेंसिंग एग्जाम NExt की तैयारी कराती हो। जैसे - कजाकिस्तान की Kokshetau स्टेट यूनिवर्सिटी।
6-सफलता मोक्ष जैसे अनुभवी कॅरिअर प्लानर को चुनें, जो एमबीबीएस एडमिशन के साथ एग्जिट एग्जाम NExt, USMLE इत्यादि की तैयारी कराते हों।
7-अधिक जानकारी के लिए आप एमबीबीएस कॅरिअर प्लानिंग टोल फ्री नंबर 18005710202 पर बात कर सकते हैं।