विवाद पर दी प्रतिक्रिया
एनसीईआरटी ने कहा, "हम हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हैं और सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना करते हैं।"
यह फैसला उस समय लिया गया है जब स्कूल की किताबों और उनमें संवैधानिक संस्थाओं के चित्रण पर बढ़ती नजर रखी जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीईआरटी की किताबें पूरे भारत में केंद्रीय और राज्य सरकार से जुड़े स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं, इसलिए किसी भी बदलाव या अध्याय हटाने का असर छात्रों और शिक्षकों दोनों पर पड़ता है।
आने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए अद्यतन पाठ्यक्रम योजना के बारे में काउंसिल की तरफ से आगे स्पष्टीकरण आने की प्रतीक्षा है।