NCERT Partition Module: अगर छात्र भारत-पाकिस्तान विभाजन के इतिहास को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं, तो अब उन्हें यह जानकारी एनसीईआरटी के एक नए मॉड्यूल के जरिए मिलेगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर विशेष मॉड्यूल जारी किया है। इस मॉड्यूल में बताया गया है कि विभाजन के लिए मुहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया गया है।
क्या है इस नए मॉड्यूल की खास बात?
इस मॉड्यूल को ‘विभाजन के अपराधी’ (Culprits of Partition) शीर्षक दिया गया है और इसे कक्षा 6 से 8 और कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए अलग-अलग रूप में तैयार किया गया है। हालांकि, यह किसी भी कक्षा की पाठ्यपुस्तक का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पूरक शैक्षिक सामग्री के तौर पर पेश किया गया है, जिसे पोस्टर, वाद-विवाद, प्रोजेक्ट्स और चर्चाओं के माध्यम से बच्चों को सिखाया जाएगा।
कश्मीर: विभाजन के बाद उभरी नई समस्या
मॉड्यूल में बताया गया है कि भारत-पाक विभाजन के बाद कश्मीर एक नई चुनौती बनकर सामने आया, जो भारत की विदेश नीति के लिए कठिनाइयां लेकर आया। इसके साथ ही कुछ देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया और कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाते रहे।
तीन प्रमुख जिम्मेदार: जिन्ना, कांग्रेस और माउंटबेटन
एनसीईआरटी द्वारा जारी मॉड्यूल में भारत-पाक विभाजन के लिए तीन प्रमुख शख्सियतों को जिम्मेदार ठहराया गया है- मुहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन। मॉड्यूल के मुताबिक, जिन्ना ने विभाजन की मांग की, कांग्रेस ने इसे स्वीकार किया और माउंटबेटन ने इसे लागू किया। इसके साथ ही इसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू का जुलाई 1947 में दिया गया एक एतिहासिक भाषण भी शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था- "विभाजन बुरा है, लेकिन एकता की कीमत चाहे जो भी हो, गृहयुद्ध की कीमत उससे कहीं ज्यादा होगी।" यह उद्धरण उस समय की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जब देश कठिन फैसलों के मोड़ पर खड़ा था।
इतिहास के अनछुए पहलुओं को शामिल किया गया
मॉड्यूल में बताया गया है कि विभाजन के दौरान करीब 6 लाख लोग मारे गए और 1.5 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए। ये तथ्य अक्सर स्कूली किताबों में पूरी तरह नहीं बताए जाते थे। इसके अलावा, मॉड्यूल में यह भी बताया गया है कि विभाजन ने देश की एकता को खंडित किया, पंजाब और बंगाल की अर्थव्यवस्था को तबाह किया और जम्मू-कश्मीर को सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता की ओर धकेला, जो आगे चलकर आतंकवाद का कारण बना।
भारत का विभाजन "गलत विचारों" के कारण हुआ
मॉड्यूल के अनुसार, भारत का विभाजन "गलत विचारों" के कारण हुआ। 1940 में मुस्लिम लीग ने लाहौर सम्मेलन में यह कहा कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़े हैं। इस सोच ने विभाजन की मांग को बल दिया। सरदार वल्लभभाई पटेल ने उस समय की स्थिति को विस्फोटक बताया और कहा कि गृहयुद्ध की तुलना में देश का विभाजन बेहतर था। वहीं महात्मा गांधी ने विभाजन का विरोध किया, लेकिन हिंसा के जरिए कांग्रेस के फैसले का विरोध नहीं करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वे विभाजन में भागीदार नहीं बनना चाहते, लेकिन हिंसा से भी कांग्रेस को रोकना उचित नहीं समझते थे।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
मॉड्यूल की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2021 के संदेश से होती है, जिसमें उन्होंने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि विभाजन के दर्द और विस्थापन को भुलाया नहीं जा सकता और लाखों लोगों ने हिंसा के कारण अपनी जान गंवाई।
विभाजन अपरिहार्य नहीं था
मध्यम स्तर के मॉड्यूल में इस बात पर जोर दिया गया है कि विभाजन "अपरिहार्य" नहीं बल्कि "गलत विचारों" का परिणाम था। पटेल ने इसे "कड़वी दवा" कहा, जबकि नेहरू ने इसे "बुरा" लेकिन "अपरिहार्य" माना।
दूसरे चरण के मॉड्यूल में मुस्लिम नेताओं की राजनीतिक सोच को विभाजन का मुख्य कारण बताया गया है। यह विचारधारा गैर-मुसलमानों के साथ स्थायी समानता को स्वीकार नहीं करती थी। इसी विचारधारा ने पाकिस्तान आंदोलन को प्रेरित किया, जिसका नेतृत्व मुहम्मद अली जिन्ना ने किया।
कैसे पढ़ाया जाएगा यह मॉड्यूल?
एनसीईआरटी के अनुसार, यह मॉड्यूल शैक्षिक परियोजनाओं, पोस्टरों, रोल-प्ले, निबंध और समूह चर्चा जैसे रचनात्मक तरीकों से पढ़ाया जाएगा। यह मॉड्यूल न केवल छात्रों को इतिहास की सच्चाई से अवगत कराएगा, बल्कि उन्हें सोचने की दिशा भी देगा।