Curiosity Science Book: एनसीईआरटी ने कक्षा 8 के लिए नई साइंस की किताब ‘क्यूरियोसिटी’ लॉन्च की है, जिसमें अब छात्र मेक इन इंडिया, कोविड-19 वैक्सीन, चंद्रयान, आदित्य L1 और भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के बारे में पढ़ेंगे।
NCERT Class 8 Science Book 2025: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की साइंस की पाठयपुस्तक ‘क्यूरियोसिटी’ में अब छात्र कोरोना काल में भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति, मेक इन इंडिया और कोविड 19 वैक्सीन के बारे में पढ़ेंगे। भारत ने कई देशों को मेक इन इंडिया वैक्सीन देकर महामारी में करोड़ों लोगों की जान बचाई। रोटावायरस वैक्सीन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, के सचिव वैज्ञानिक व डॉक्टर महाराज किशनभान भी शामिल हैं। उन्होंने इनोवेशन और साइंस को बढ़ावा देने, बच्चों को डायरिया से बचाने वाले रोटावायरस वैक्सीन बनाने, भारत में किफायती स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने पर जोर दिया था।
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एनसीईआरटी ने 21वीं सदी की मांग के आधार पर पाठयपुस्तक तैयार की है। अमर उजाला के पास एनसीईआरटी की ‘क्यूरियोसिटी’ पाठयपुस्तक उपलब्ध है। इसमें जानकारी के साथ जिज्ञासाओं को भी दूर किया है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ ) 2023 पर आधारित है। छात्र भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान के अलावा पृथ्वी विज्ञान भी पढ़ेंगे।
इसका मकसद, पर्यावरण जागरूकता, नैतिक मूल्यों और भारत की ज्ञान की समृद्ध परंपरा से रूबरू करवाना है। उदाहरण के तौर पर, भारत की ज्ञान की समृद्ध परंपरा में आधुनिक टीकों से बहुत पहले, भारत में चेचक से बचाव के लिए ‘वैरियोलाइज़ेशन’ नाम की पारंपरिक विधि से इलाज होता था। प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य कणाद ने सबसे पहले परमाणु (परमाणु) की अवधारणा पेश की थी। उनका मानना था कि पदार्थ परमाणु नामक सूक्ष्म, शाश्वत कणों से बना है।
प्राचीन भारतीय ग्रंथ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, रसरत्न समुच्चय, रस जल निधि आदि में औषधीय प्रयोजनों के लिए मिश्र धातुओं के उपयोग और एलोपैथी के अलावा भारत में प्राचीन काल से आयुर्वेद, सिद्धा व पांरपरिक चिकित्सा प्रणाली के बारे में बताया है। इससे छात्रों को काफी कुछ जानने का मौका मिलेगा।
उत्तरायण और दक्षिणायन सूर्य की गति की दो स्थितियां
12वीं शताब्दी के प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री भास्कराचार्य -दो भी शामिल हैं। उन्होंने 800 साल पहले माना, पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करती है। उन्होंने ग्रहों की स्थिति, संयोजनों, ग्रहणों, ब्रह्मांड विज्ञान, भूगोल, और गणितीय तकनीकों को लिखा। वहीं, उतरायण और दक्षिणयन के बारे में बताया था।
इसरो का सफर चंद्रयान, आदित्य के बारे जानेंगे छात्र
हमारा साइंटिफिक हेरिटेज में छात्र इसरो का सफर, चंद्रयान 1 व 2, आदित्य एल 1 के बारे में जानेंगे। इसरो द्वारा भेजे गए विभिन्न सेटेलाइट का भी उल्लेख है। जिसमें आर्टिफिशियल सेटेलाइट भी शामिल है। इससे मौसम की सटीक जानकारी, डिजास्टर मैनेजमेंट व साइंटिफिक रिसर्च में मदद मिलती है। पुस्तक में भारतीय वैज्ञानिकों में विभिन्न प्रकार के पौधों से मलेरिया की दवा तैयार करने वाली रसायनशास्त्री असीमा चटर्जी, महान भौतिक विज्ञानी व खगोलशास्त्री मेघनाद साहा, कैंसर और कैंसर के रोकथाम पर काम करने वाली डॉ. कमल रणदिवे को भीशामिल किया है।