कॉलेज में घूस पर भी बोले
नवीन के पिता ने आगे कहा कि देश के मेडिकल कॉलेजों में एक सीट के लिए करोड़ों रुपये घूस देने पड़ते हैं। भले ही कॉलेज निजी नियंत्रण में क्यों न हो गई हो। इस कारण मेडिकल की पढ़ाई कईयों के लिए मुश्किल है।
पीएम मोदी ने जताया शोक
नवीन खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में मेडिकल के चौथे वर्ष में पढ़ाई कर रहा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जब वह अपने अपार्टमेंट से स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी रूस के हमले की वजह से लगी आग की चपेट में आ गया। जिसके कारण उसकी मौत हो गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी ट्वीट करके नवीन की मौत पर दुख जताया है। पीएम मोदी ने भी नवीन के पिता ज्ञानगौड़ा शेखरप्पा से बात की है और शोक जताया है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ने उन्हें दो से तीन दिनों में नवीन का शव यूक्रेन से वापस लाने के लिए व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है।
बचपन से बढ़िया छात्र थे नवीन
ज्ञानगौड़ा शेखरप्पा ने बताया कि नवीन बचपन से ही पढ़ाई में बढ़िया छात्र थे। उन्होंने कभी ट्यूशन नहीं किया था। कक्षा दसवीं में उन्हें 96 फीसदी अंक आए थे। वहीं, कक्षा बारहवीं में उन्होंने 97 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। कक्षा दसवीं से ही नवीन डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे। शेखरप्पा ने आगे बताया कि देश की शिक्षा व्यवस्था और जातिवाद के कारण नवीन को मेडिकल की सीट नहीं मिल पाई थी। कैपिटेशन फीस और घूस की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को यहां एक मेडिकल की सीट के लिए एक से दो करोड़ रुपये देने पड़ते हैं।
राजनीतिक, शिक्षण व्यवस्था से नाराजगी
शेखरप्पा ने आगे कहा कि मैं देश की राजनीतिक, शिक्षण व्यवस्था और जातिवाद से उदास हूं। देश सबकुछ प्राइवेट संस्थानों के हाथों में हैं। जब शिक्षा कुछ ही लाख रुपये में मिल सकती है तो करोड़ों रुपये क्यों देने पड़ते हैं। यूक्रेन में शिक्षा, उपकरण आदि भारत के मुकाबले काफी बेहतर है। उन्होंने बताया कि नवीन की शिक्षा के लिए उन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे लिए थे। राजनेताओं पर खराब शिक्षा व्यवस्था का आरोप लगाते हुए उन्होंने पीएम मोदी से शिक्षण संस्थानों में कम खर्च में बेहतर शिक्षा की व्यवस्था कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि कम से कम अब इस दिशा में कुछ कोशिशें होनी चाहिए।
उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से यूक्रेन में फंसे अन्य छात्रों को वापस लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमें कोई भी सूचना नहीं मिल रही है। कोई भी हमें हमारे बच्चों के सुरक्षा की सूचना नहीं दे रहा।