क्वांटम विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ
- फोटो : Amar Ujala
Quantum University: क्वांटम विश्वविद्यालय ने 2 जून 2025 को आयोजित "एक सतत भविष्य के लिए दीर्घकालिक शिक्षाः एक मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और भाषाई दृष्टिकोण" विषय पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन किया।
आईसीएसएसआर द्वारा प्रायोजित इस एक दिवसीय शैक्षणिक कार्यक्रम में भारत भर से आए विभिन्न विचारकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भविष्य के समावेशी तथा स्थायी शैक्षणिक ढांचे को लेकर गहन विमर्श किया।
क्वांटम विश्वविद्यालय सेमिनार
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उद्घाटन समारोहः एक राष्ट्रीय शैक्षणिक संवाद की सोचपूर्ण शुरुआत
2 जून 2025 को संगोष्ठी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के हार्मनी हॉल में हुआ। प्रातः 10:00 बजे विशिष्ट अतिथियों का वीआईपी लॉन्ज में औपचारिक स्वागत किया गया। 10:30 बजे मुख्य अतिथि का स्वागत Martyr Wall पर किया गया और उन्हें मुख्य सभागार में आदरपूर्वक ले जाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत क्वांटम विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा राष्ट्रगान की मधुर प्रस्तुति के साथ हुई। कार्यक्रम का संचालन ईशा मनकतला ने किया।
क्वांटम विश्वविद्यालय सेमिनार
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स्वागत भाषण एवं वक्तव्यः अकादमिक दृष्टि और समकालीन चुनौतियों का संगम
Quantum School of Business के निदेशक डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण देते हुए राष्ट्र के विकास ढांचे में दीर्घकालिक शिक्षा के समावेशन की आवश्यकता को रेखांकित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेक कुमार ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में यह बताया कि सतत शिक्षा किस प्रकार से वैश्विक और स्थानीय दोनों समस्याओं का समाधान बन सकती है।
शिक्षण प्रणाली की पुनर्कल्पना की अपील
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश चंद्र शास्त्री ने संगोष्ठी का मुख्य भाषण दिया। उन्होंने अपने संबोधन में दीर्घकालिक शिक्षा के मनोवैज्ञानिक, आर्थिक एवं भाषाई पहलुओं को विस्तृत रूप से समझाया और इसे एक सतत समाज की आधारशिला बताया। उन्होंने इस विचारोत्तेजक मंच के लिए Quantum University और ICSSR की प्रशंसा की।