पिछले हफ्ते दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ राज्य के कई जिलों में भारी बारिश हुई थी, लेकिन सोमवार सुबह मौसम सुहावना रहा। शहरों से लेकर गांवों तक, स्कूलों में बच्चों की चहलकदमी देखी गई। बच्चे नई किताबों, बस्तों और यूनिफॉर्म के साथ पूरे जोश में स्कूल पहुंचे।
रंग-बिरंगे स्वागत से महके स्कूल
वहीं, शिक्षकों ने स्वागत को खास बनाने के लिए स्कूलों को गुब्बारों, झंडियों और नारियल की पत्तियों से सजाया। कई स्कूलों में नए बच्चों के स्वागत के लिए ढोल और तालियां भी बजाईं। राज्यभर में कक्षा एक में दाखिला लेने वाले बच्चों की संख्या दो लाख से अधिक रही, हालांकि सटीक आंकड़े बाद में जारी किए जाएंगे।
इस बीच, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अलप्पुझा में एक राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित समारोह में पारंपरिक दीप जलाकर स्कूल के औपचारिक रूप से फिर से खुलने वाले "प्रवेशोत्सवम 2026-26" का उद्घाटन किया। सीएम ने कार्यक्रम में अध्ययन सामग्री के राज्य-स्तरीय वितरण का भी शुभारंभ किया।
बच्चों में धर्मनिरपेक्ष सोच विकसित होनी चाहिए: सीएम विजयन
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ ज्ञान देना नहीं, बल्कि विवेक और समझ विकसित करना होना चाहिए। बच्चों में धर्मनिरपेक्ष सोच और लोकतांत्रिक चेतना भी विकसित होनी चाहिए।”
शिक्षकों की भी दी सलाह
उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ बच्चे ही नहीं, शिक्षकों को भी नए ज्ञान और तरीकों से खुद को अपडेट करते रहना चाहिए। स्कूलों को एकजुट होकर ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जो छात्रों के भीतर जिज्ञासा और सवाल करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे।
15 जून तक सभी स्कूलों को बनाना होगा मास्टर प्लान
मुख्यमंत्री विजयन ने बताया कि इस शैक्षणिक वर्ष में राज्य सरकार कई व्यापक बदलाव कर रही है। 15 जून तक सभी स्कूलों को अपना शैक्षणिक मास्टर प्लान तैयार करना होगा, जिसमें बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ-साथ अकादमिक गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर होगा।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस वर्ष से मूल्यांकन प्रणाली में भी बड़ा बदलाव किया जाएगा। पूरी स्कूली व्यवस्था को एक छत के नीचे लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 2016 में राज्य के पांच लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया था और करीब एक हजार स्कूल बंद कर दिए गए थे। लेकिन पिछले नौ वर्षों में राज्य सरकार ने ₹5,000 करोड़ की लागत से स्मार्ट स्कूल, स्मार्ट क्लासरूम और बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में एक नई कहानी लिखी है।
इस अवसर पर राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी, मत्स्य मंत्री साजी चेरियन समेत कई अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। नए सत्र की शुरुआत के साथ सरकार ने समय-सारणी में बदलाव और मूल्यों पर आधारित शिक्षा जैसी कई नई पहलें भी लागू की हैं। यह बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में केरल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।