मेडिकल शिक्षा को बेहतर और सहभागिता बढ़ाने पर किया काम: मंत्री
एक सवाल के जवाब में मंत्री सारंग ने कहा, "पहले जब मैं मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर था तो मैंने एमपी में हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई कराने की पहल शुरू की। प्रधानमंत्री जी ने जब लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को अलग करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बात की, तो उन्होंने यही बात कही थी कि क्यों न इस देश में मेडिकल और टेक्निकल एजुकेशन भी हिंदी में या क्षेत्रीय भाषाओं में होनी चाहिए। हमने माननीय मोदी जी के निर्देश को चुनौती के रूप में लिया और निर्णय लिया कि हम एमपी में हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू करेंगे।"
हमने मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी से बात की उन्हें इसके लिए मनाया। भोपाल के मंदार में वॉर रूम बनाया और लगभग आठ महीनों की मेहनत के बाद मेडिकल प्रथम वर्ष के चार सब्जेक्ट का रूपांतरण किया। हमने ट्रांसलेशन नहीं किया, हमने ट्रांसलिटरेशन किया। जो हमने लॉन्च किया वो आज तक चल रहा है।
मेरी ऐसी सोच थी कि हम हिंदी और अंग्रेजी में लड़ाई नहीं कराना चाहते थे। हमने मेडिकल टर्मिनोलॉजी को नहीं बदला। हमने अंग्रेजी में चलने वाली किताबों का ट्रांसलिटरेशन इतनी बखूबी किया कि कहीं कोई दिक्कत नहीं होती।