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जीके: ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव क्या है? शिक्षक एमएलसी चुनाव में किसे होता है वोट देने का अधिकार? पढ़ें जानकारी

Thu, 29 Oct 2026 07:02 AM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव में वोट देने के लिए क्या सिर्फ डिग्री होना काफी है? शिक्षक एमएलसी चुनाव में किन शिक्षकों को मिलता है मतदान का अधिकार? जानिए आसान भाषा में पूरी जानकारी, ताकि चुनाव टर्म्स को समझने में कोई उलझन न रहे।
 
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MLC Election 2026 - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के चार राज्यों में एमएलसी चुनाव की चर्चा के बीच ग्रेजुएट एमएलसी और शिक्षक एमएलसी जैसे शब्द सुनने में आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव में कौन वोट दे सकता है? क्या केवल स्नातक की डिग्री होने से मतदान का अधिकार मिल जाता है? इसी तरह, क्या हर सरकारी और निजी स्कूल का शिक्षक शिक्षक एमएलसी चुनाव में वोट डाल सकता है? दरअसल, विधान परिषद की इन सीटों के लिए मतदान के अलग-अलग नियम हैं। स्नातक होने या शिक्षक होने के साथ-साथ कुछ जरूरी शर्तें पूरी करना और संबंधित मतदाता सूची में नाम दर्ज होना भी जरूरी है।

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आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि ग्रेजुएट और शिक्षक एमएलसी चुनाव क्या हैं और इनमें वोट देने का अधिकार किसे मिलता है...

ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव का क्या मतलब है?

ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव, विधान परिषद की उन सीटों के लिए होता है जिनमें पात्र और पंजीकृत स्नातक मतदाता अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं। इसे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भी कहा जाता है। इस चुनाव में हर स्नातक व्यक्ति अपने आप वोट नहीं दे सकता। इसके लिए निर्धारित शर्तें पूरी करना और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना जरूरी है।

ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव में कौन वोट दे सकता है?

इसके लिए मुख्य रूप से ये शर्तें लागू होती हैं:

  • स्नातक की डिग्री: व्यक्ति के पास किसी मान्य विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री या नियमों के तहत मान्य समकक्ष योग्यता होनी चाहिए।
  • तीन साल की शर्त: संबंधित मतदाता सूची की निर्धारित तारीख से कम-से-कम तीन साल पहले स्नातक की डिग्री प्राप्त की होनी चाहिए।
  • संबंधित क्षेत्र का निवासी: व्यक्ति सामान्य रूप से उसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।
  • मतदाता सूची में नाम: संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना जरूरी है।
     

उदाहरण से समझिए: मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने वर्ष 2022 में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली। केवल डिग्री होने से उसे ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं मिल जाएगा। उसे निवास संबंधी शर्त और अन्य नियम पूरे करने होंगे तथा मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना होगा।

शिक्षक एमएलसी चुनाव क्या होता है?

शिक्षक एमएलसी चुनाव, विधान परिषद की उन सीटों के लिए होता है जिनमें निर्धारित शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने का जरूरी अनुभव रखने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं। इसका उद्देश्य शिक्षकों को विधान परिषद में अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर देना है। हालांकि, हर शिक्षक को इस चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं होता। इसके लिए कानून में तय शर्तें पूरी करनी होती हैं।

शिक्षक एमएलसी चुनाव में कौन वोट दे सकता है?

मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

  • पढ़ाने का अनुभव: निर्धारित तारीख से पहले के छह वर्षों के दौरान कुल कम-से-कम तीन साल तक पात्र शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाया हो।
  • मान्य शैक्षणिक संस्थान: जिस संस्थान में व्यक्ति ने पढ़ाया है, वह संबंधित राज्य के नियमों के तहत निर्धारित स्तर का होना चाहिए। सामान्य रूप से यह स्तर माध्यमिक विद्यालय से नीचे का नहीं होना चाहिए।
  • संबंधित क्षेत्र का निवासी: व्यक्ति सामान्य रूप से उसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।
  • मतदाता सूची में नाम: संबंधित शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना जरूरी है।

उदाहरण से समझिए: मान लीजिए, कोई शिक्षक पिछले छह वर्षों में कुल चार साल तक निर्धारित शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ा चुका है। यदि वह निवास और अन्य जरूरी शर्तें भी पूरी करता है और मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज है, तो वह शिक्षक एमएलसी चुनाव में वोट देने के योग्य हो सकता है। गौरतलब है कि केवल सरकारी शिक्षक होना जरूरी शर्त नहीं है। निजी संस्थान में पढ़ाने वाले शिक्षक भी पात्र हो सकते हैं, बशर्ते संस्थान और शिक्षण अनुभव संबंधित नियमों के अनुरूप हों।

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ग्रेजुएट एमएलसी और शिक्षक चुनाव कौन लड़ सकता है?

  • ग्रेजुएट सीट: उम्मीदवार का उसी राज्य की किसी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम होना चाहिए। केवल ग्रेजुएट सीट से लड़ने के लिए खुद ग्रेजुएट होना अनिवार्य नहीं है।
  • शिक्षक सीट: उम्मीदवार का उसी राज्य की किसी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम होना चाहिए। खुद शिक्षक होना या तीन साल पढ़ाने का अनुभव होना उम्मीदवार बनने की अनिवार्य शर्त नहीं है।
  • अन्य जरूरी नियम: उम्मीदवार को चुनाव कानून के तहत लागू अन्य योग्यताएं पूरी करनी होंगी और किसी अयोग्यता के दायरे में नहीं होना चाहिए।
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