ऐसे मिली मान्यता
मिजोरम को यह मान्यता यूएलएलएएस पहल के तहत दी गई है, जो शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित है। इस पहल में न्यूनतम 95% साक्षरता दर को मानक माना गया है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएसएफएस 2023–2024)के अनुसार, मिजोरम ने 98.2% साक्षरता दर प्राप्त की है। यह अभूतपूर्व सफलता राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, विशेष रूप से समग्र शिक्षा अभियान और नई भारत साक्षरता कार्यक्रम (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के अंतर्गत प्राप्त की है। राज्य सरकार ने राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अंतर्गत
एक गवर्निंग काउंसिल और कार्यकारी समिति का गठन किया, जिसके तहत समग्र शिक्षा मिजोरम द्वारा इस अभियान को संचालित किया गया। इस अभियान को समर्थन देने हेतु एससीईआरटी के तहत राज्य साक्षरता केंद्र की स्थापना की गई। इसमें मिजो भाषा में शिक्षण सामग्री विकसित की गई, साथ ही लॉंगतलाई ज़िले के शिक्षार्थियों के लिए अंग्रेज़ी संस्करण भी तैयार किया गया। इसके अतिरिक्त कई अन्य संसाधान तैयार किए गए।
ऐसे मिलती है पूर्ण साक्षरता की मान्यता
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा तैयार आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस ) की वार्षिक रिपोर्ट (जुलाई 2023 - जून 2024) के अनुसार, मिजोरम ने 98.2% साक्षरता दर हासिल कर ली है (जिसमें पुरुषों के लिए 99.2% और महिलाओं के लिए 97% साक्षरता दर्ज की गई है)। इस आंकड़े के अनुसार, मिजोरम ने पूर्ण साक्षरता की सीमा, यानी 95% से अधिक साक्षरता दर (जिसे 100% साक्षरता के समतुल्य माना जाता है), को पार कर लिया है, जैसा कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी पत्र क्रमांक डी.ओ. नंबर 84/2024-AE.2 दिनांक 7 अगस्त 2024 में परिभाषित किया गया है।
यूं मिली सफलता
क्लस्टर रिसोर्स सेंटर समन्वयकों (सीआरसीसीएस) ने सर्वेक्षणकर्ताओं की भूमिका निभाई और 3,026 निरक्षरों की पहचान की, जिनमें से 1,692 लोगों ने पढ़ने की इच्छा व्यक्त की। जिला परियोजना कार्यालयों ने 292 स्वयंसेवी शिक्षकों की भर्ती की, जिन्होंने स्कूलों, सामुदायिक हॉलों, वाईएमए पुस्तकालयों, और जहां ज़रूरत पड़ी वहां घरों में भी नियमित कक्षाएँ संचालित कीं। इस तरह से अब जब मिजोरम की साक्षरता दर 98.2% है, तो यह यूएलएलएए के अंतर्गत मान्यता प्राप्त भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है।