एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य केवल आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता प्रदान करना नहीं है। बल्कि यह उन अन्य घटकों को भी शामिल करेगा जो 21वीं सदी के व्यक्ति की जरूरत है। इसके माध्यम से वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, वाणिज्यिक कौशल, स्वास्थ्य देखभाल और जागरूकता, महत्वपूर्ण जीवन शिक्षा, और परिवार कल्याण आदि पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय रोजगार प्राप्त करने की दृष्टि से व्यावसायिक कौशल विकास, प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक स्तर की बुनियादी शिक्षा आदि पर भी जोर दिया जाएगा।
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत सतत शिक्षा जिसमें कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, खेल और मनोरंजन के वयस्क शिक्षा के पाठ्यक्रम शामिल हैं और स्थानीय लोगों के लिए जीवन कौशल आदि पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस योजना को स्वयंसेवियो की मदद से ऑनलाइन मोड में बढ़ाया जाएगा। इसमें ट्रेनिंग सत्र, वर्कशॉप आदि का भी आयोजन किया जाएगा। पंजीकृत स्वयंसेविओं की मदद के लिए सभी संसाधन डिजिटल माध्यम जैसे टीवी, रेडियो, ओपन सोर्स एप और पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।
इतनी राशि होगी खर्च
अनुमान के मुताबिक नव भारत साक्षरता कार्यक्रम में 1037.90 रुपये का खर्च आने वाला है। इसमें 700 करोड़ की राशि केंद्र सरकार और 337.90 करोड़ की राशि राज्य सरकार खर्च करेगी। इसके साथ ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नवोन्मेषी (इनोवेटिव) कार्यों को कराने की सहूलियत दी गई है। स्कूलों को योजना के क्रियान्वयन के ईकाई के रूप में प्रयोग किया जाएगा। इसे लाभार्थियों के सर्वेक्षण के लिए प्रयोग में लाया जाएगा।
