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MIG-21: 50 साल से भी ज्यादा पुराने मिग-21 विमान क्यों हैं देश की मजबूरी, सभी स्क्वाड्रन 2025 तक होंगे रिटायर

Fri, 29 Jul 2022 11:50 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

रिपोर्ट के मुताबिक वायुसेना की ओर से इस साल 30 सितंबर को मिग-21 बाइसन के एक स्क्वाड्रन को रिटायर कर दिया जाएगा। वहीं, इस विमान के सभी स्क्वाड्रन साल 2025 तक रिटायर कर दिए जाएंगे। 
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MIG 21 Crash - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग कॉफिन (उड़ता ताबूत) के नाम से मशहूर मिग-21 विमान के क्रैश होने की एक और घटना सामने आई है। गुरुवार की रात राजस्थान के बाड़मेर में मिग-21 हादसे का शिकार हो गया और एक बार फिर से देश ने दो प्रतिभाशाली पायलटों को खो दिया है। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग एक बार फिर से मिग-21 विमान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि क्या कारण है कि वायुसेना इतने अधिक नंबर में क्रैश की घटनाओं के बाद भी इन विमानों का प्रयोग कर रही है। 
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MIG-21 - फोटो : Social Media
पहले जानें मिग-21 के बारे में कुछ खास बातें
रूस की मिकोयान कंपनी द्वारा इस विमान का निर्माण साल 1955 के करीब किया गया था। भारतीय वायु सेना में साल 1963 में शामिल किया गया। भारत ने कुल 874 मिग-21 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया था। वर्तमान में वायुसेना इसके अपग्रेडेड वर्जन मिग-21 बाइसन का प्रयोग करती है। भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इस विमान को लाइसेंस के तहत अपग्रेड करती है। हालांकि, ये विमान सैकड़ों बार हादसे का शिकार हो चुके हैं और सैकड़ों की संख्या में पायलट भी अपनी जान गंवा चुके हैं। यही कारण है कि करीब 6 दशक पुराना हो चुके इन विमानों के इस्तेमाल करने को लेकर कई बार सवाल खड़े किए जाते रहे हैं। 

मिग 21 - फोटो : Social Media
स्क्वाड्रन की कमी है मुख्य वजह
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में सबसे पुराना मिग-21 ही है। इसे अब भी इस्तेमाल करने का मुख्य कारण वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या में कमी है। आसान शब्दों में बताए तो वायुसेना में स्क्वाड्रन विमानों के एक समूह को बोला जाता है। एक स्क्वाड्रन में करीब 16 से 18 विमान होते हैं। मिग-21 के चार स्क्वाड्रन (64 विमान अनुमानित) वायुसेना के पास में उपलब्ध है।

मिग 21 - फोटो : IAF
चीन-पाकिस्तान का दोहरा खतरा
भारत की एक सीमा पर चीन है तो वहीं, दूसरी सीमा पर पाकिस्तान। इन दोनों से ही भारत को खतरा है। विभिन्न मौकों पर युद्ध और अन्य सीमा विवादों ने इस बात को साबित किया है। इसलिए इस दोहरे खतरे से निबटने के लिए देश की वायुसेना का मजबूत रहना जरूरी है। वायुसेना को इस खतरे से निपटने के लिए कम से कम 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। हालांकि, वर्तमान में हमारे पास 32-33 स्क्वाड्रन ही मौजूद है। अगर इनमें से मिग-21 के चार स्क्वाड्रन को तत्काल रूप से रिटायर कर दिया जाए तो यह संख्या 30 से नीचे आ जाएगी। जो सामरिक रूप से हमारे लिए कहीं से भी हितकारी नहीं होगा।

MiG 21 aircraft - फोटो : अमर उजाला
सितंबर में रिटायर होगा एक स्क्वाड्रन 
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक वायुसेना की ओर से इस साल 30 सितंबर को मिग-21 बाइसन के एक स्क्वाड्रन को रिटायर कर दिया जाएगा। वहीं, इस विमान के सभी स्क्वाड्रन साल 2025 तक रिटायर कर दिए जाएंगे। 
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तेजस - फोटो : ANI
ये विमान लेंगे मिग-21 का स्थान
मिग-21 को रिटायर कर के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को इसकी जगह दी जाएगी। बता दें कि बीते साल वायु सेना ने 48 हजार करोड़ के सौदे के तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एचएएल को 83 तेजस विमानों का ऑर्डर दिया है। हालांकि, इनकी डिलीवरी में अब भी काफी समय बाकी है। वायुसेना के जगुवार, मिराज-2000 जैसे विमान भी अब पुराने हो चले हैं। इन्हें भी कुछ समय बाद रिटायर किया जाएगा। इस कमी को पूरा करने के लिए वायुसेना ने करीब एक लाख करोड़ रुपये के एमआरएफए सौदे के तहत 114 लड़ाकू विमानों को खरीदने की योजना बना रखी है। इसके अलावा पांचवीं-छठी पीठी के आधुनिक विमान AMCA का भी निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, इन सभी खरीद और निर्माण के बाद भी आने वाले दशक तक स्क्वाड्रन की संख्या को 42 ले जाना मुश्किल लगता है। 
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