'लेखकों की रचनात्मकता प्रभावित होगी'
पीटीआई को दिए इंटरव्यू में डैनिनो ने कहा कि कई शिक्षाविदों और टिप्पणीकारों ने अदालत के आदेशों के बाद 'चिलिंग इफेक्ट' शब्द का इस्तेमाल किया है। उनके मुताबिक, इससे पाठ्यपुस्तक लेखक नए प्रयोग करने से डरेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि भारत नई पीढ़ी की किताबें तैयार करना चाहता है तो रचनात्मकता और नवाचार बेहद जरूरी हैं। डैनिनो ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव की बात करती है, लेकिन अगर लेखक हर वाक्य पर आपत्तियों से डरेंगे तो ऐसा बदलाव संभव नहीं होगा।
'भारत की शिक्षा व्यवस्था जरूरत से ज्यादा किताबों पर निर्भर'
डैनिनो ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को 'अत्यधिक पाठ्यपुस्तक-केंद्रित' बताया। उन्होंने कहा कि कई विकसित देशों में किताबें केवल अतिरिक्त पढ़ाई के लिए होती हैं, जबकि कक्षा में शिक्षक अपने नोट्स और सामग्री के आधार पर पढ़ाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में असली सवाल सिर्फ स्कूल बैग का वजन कम करना नहीं, बल्कि कक्षा में किताबों पर निर्भरता घटाना होना चाहिए। इसके लिए शिक्षकों को रिसर्च आधारित शिक्षण के लिए तैयार करना जरूरी है।
हालांकि उन्होंने माना कि भारत में यह बदलाव आसान नहीं होगा, क्योंकि बड़ी संख्या में शिक्षक अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं और कई स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं भी कमजोर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के आधे से ज्यादा स्कूलों में अब भी इंटरनेट सुविधा नहीं है, जिसके कारण किताबें ही पढ़ाई का मुख्य साधन बनी हुई हैं।
डैनिनो के अनुसार, अगर भारत इस समस्या को गंभीरता से नहीं समझता तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।