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SC: सुप्रीम कोर्ट में फंसी नीट-SS काउंसलिंग, 500 FMGE डॉक्टर इंतजार में, DM दाखिले के नए नियमों का भी विरोध

Mon, 27 Jul 2026 11:05 AM IST
Akash Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

नीट-यूजी विवाद के बीच मेडिकल शिक्षा में तीन नए संकट खड़े हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में विवाद के कारण नीट-एसएस काउंसिलिंग अटकी है, 500 एफएमजीई डॉक्टर इंटर्नशिप के इंतज़ार में हैं और डीएम दाखिले के नए नियमों का देश भर में विरोध हो रहा है।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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Supreme Court: नीट यूजी विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं है कि अब चिकित्सा शिक्षा से जुड़े तीन नए मुद्दों पर डॉक्टरों और छात्रों की नाराजगी बढ़ गई है। एक ओर नीट-एसएस (सुपर स्पेशियलिटी) की काउंसिलिंग पिछले पांच महीने से सुप्रीम कोर्ट में अटके विवाद के कारण शुरू नहीं हो सकी है।

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दूसरी ओर एफएमजीई (विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों की परीक्षा) पास कर चुके करीब 500 डॉक्टर काउंसिलिंग का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डीएम) में दाखिले के नियम बदलने की तैयारी के खिलाफ भी देशभर के डॉक्टर खुलकर सामने आ गए हैं।

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अप्रैल में पूरी होनी थी काउंसलिंग

नीट-एसएस की काउंसिलिंग अप्रैल में पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन तमिलनाडु के सर्विस कोटा से जुड़े विवाद के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार ने इस बार सर्विस कोटे के तहत सुपर स्पेशियलिटी की करीब 250 सीटें ले लीं। हालांकि, इसमें केवल लगभग 60 सीटों पर ही दाखिला हो पाया। शेष करीब 190 सीटें ऑल इंडिया कोटे में वापस भेजी जानी थीं।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने राज्य सरकार से सीटें लौटाने को कहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बची हुई सीटें वापस करने का आदेश दिया। इसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने फिर याचिका दायर कर दिया। फिलहाल इस विवाद से जुड़े तीन मामले सुप्रीम कोर्ट में ही लंबित हैं और डॉक्टरों ने अदालत में अवमानना याचिका भी दाखिल की है। डॉक्टरों का कहना है कि अगस्त शुरू होने वाला है, लेकिन हजारों सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टर अब भी प्रशिक्षण और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जबकि देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहले से कमी है।

नीट-एसएस की काउंसिलिंग अप्रैल में पूरी हो जानी चाहिए थी, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

इंटर्नशिप का नहीं मिल रहा मौका

विदेश से एमबीबीएस कर भारत लौटे और एफएमजीई परीक्षा पास कर चुके करीब 500 डॉक्टर भी लंबे समय से काउंसिलिंग का इंतजार कर रहे हैं। इन डॉक्टरों का कहना है कि परीक्षा पास करने के बावजूद उन्हें इंटर्नशिप और आगे की प्रक्रिया शुरू करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। छात्रों ने इस संबंध में दिल्ली मेडिकल काउंसिल से भी संपर्क किया। उन्हें दूसरे कॉलेजों में समायोजन की संभावना का भरोसा दिया गया है, लेकिन अभी तक अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है।
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सुपर स्पेशियलिटी प्रशिक्षण व्यवस्था होगी प्रभावित

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सुपर स्पेशियलिटी कोर्स डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डीएम) में प्रवेश के नियमों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई है। समिति यह देखेगी कि कुछ अन्य एमडी विशेषज्ञों के डॉक्टरों को भी डीएम पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। 

प्रस्ताव के अनुसार, एमडी बायोकेमिस्ट्री करने वाले डॉक्टरों को डीएम एंडोक्रिनोलॉजी, एमडी इमरजेंसी मेडिसिन करने वालों को डीएम न्यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी, जबकि एमडी ट्रॉपिकल मेडिसिन करने वालों को गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, रूमेटोलॉजी, क्रिटिकल केयर, नेफ्रोलॉजी और हेमेटोलॉजी जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने पर विचार किया जा रहा है। 

अब इसका विरोध शुरू हो गया है। खुलकर डॉक्टर्स इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि इसका असर गुणवत्ता पर पड़ेगा। आईएमए जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने कहा कि यह प्रस्ताव एमडी मेडिसिन डॉक्टरों के लिए बड़ा झटका है। इससे सुपर स्पेशियलिटी प्रशिक्षण की मौजूदा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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