छह दोस्तों के एक समूह ने उठाया था अनाथालय के बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा
कितने हैरान होंगे आप, जब सड़क किनारे तंबू गाड़कर रहने वाले बच्चे आपसे अंग्रेजी में बात करने लगें। सुनने में तो यह असंभव-सा ही लगता है, लेकिन इसे संभव कर दिखाया है ‘मेक अडिफरेंस’ नाम की संस्था चलाने वाली और मूलरूप से कोच्चि की रहने वाली ग्लोरिया बेनी ने। कॉलेज लाइफ के दौरान उनका छह दोस्तों का समूह था। एक बार उस समूह में किसी का जन्मदिन आया तो सभी ने शहर के एक अनाथालय में बच्चों के साथ जन्मदिन मनाने का फैसला किया।
ग्लोरिया ने बताया, ‘‘जब हम उस अनाथालय में गए तो हमने वहां देखा कि बच्चे बहुत प्रतिभाशाली हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उनके प्रतिभा की कदर नहीं हो रही है। हमने अनाथालय के बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के लिए एक समूह बनाया और उसका नाम ‘मेक अ डिफरेंस’ रखा। हमने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने से शुरुआत की।’’ वक्त बीतता गया और कॉलेज कब खत्म हो गया पता ही नहीं चला।
ग्लोरिया को हैदराबाद में गूगल में नौकरी मिल गई।
हालांकि गूगल जैसी संस्था में 5 वर्ष काम करने के बाद भी ग्लोरिया को आत्मसंतुष्टि नहीं मिल पा रही थी। ग्लोरिया कहती हैं, ‘‘मैं गूगल में थी, लेकिन मेरा मन 'मेक अ डिफेरेंस ग्रुप' को लेकर चिंतित रहता था। एक दिन मैंने फैसला कर लिया कि मैं गूगल को छोड़कर अपने ग्रुप को फिर से खड़ा करूंगी।’
’ वे बताती हैं, ‘‘हमें ऐसे युवा स्वयंसेवकों की जरूरत थी, जो अपना कुछ समय बच्चों को दे सकें। इसके लिए हमने कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं से संपर्क किया।’’ जिस समूह में कभी सिर्फ छह लोग हुआ करते थे, अब उसमें करीब 4,500 स्वयंसेवक हैं। ग्लोरिया बताती हैं, ‘‘हमने 80 बच्चों के साथ शुरुआत की थी, लेकिन अब हम 5,000 बच्चों को पढ़ाते हैं।’