जब डॉ. राधाकृष्णन 1962 में राष्ट्रपति बने तब यह खबर सुनकर विश्व के महान दार्शनिकों में से एक बर्ट्रेंड रसेल को बहुत खुशी हुई और उन्होंने कहा, ''यह दर्शनशास्त्र के लिए बड़ा सम्मान है कि डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं, मैं एक दार्शनिक के तौर पर बहुत ही अच्छा महसूस कर रहा हूं। प्लेटो चाहते थे कि दार्शनिक राजा बनें और भारत द्वारा यह दार्शनिकों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है।''
जवाहर लाल नेहरू 1957 में डॉ. राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाना चाहते थे। लेकिन मौलाना आजाद के विरोध के बाद यह नहीं हो सका। लेकिन 1962 में नेहरू ने डॉ. राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाने का निश्चय कर लिया था।
के नटवर सिंह के मुताबिक, डॉ. राधाकृष्णन ने एक बार इंदिरा गांधी सरकार की आलोचना कर दी थी, जो उन्हें पसंद नहीं आई और उन्होंने 1967 में राधाकृष्णन को दूसरी बार राष्ट्रपति बनाने से मना कर दिया।डॉ. राधाकृष्णन को 1933 से 1937 तक लगातार पांच बार साहित्य में नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। 1954 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।