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महात्मा गांधी: एनसीईआरटी की नई किताब में गांधीजी के 'राम राज्य' का जिक्र, कैसा था आदर्श शासन का मॉडल?

Wed, 30 Sep 2026 08:00 PM IST
शिवम तिवारी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में महात्मा गांधी के रामराज्य की कल्पना को सुशासन, पारदर्शिता, जनकल्याण और जनता के हित से जोड़कर समझाया गया है।
 
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गांधीजी के रामराज्य में कैसे चलता था शासन? NCERT ने बच्चों को समझाया पूरा फॉर्मूला - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में महात्मा गांधी की शासन को लेकर सोच के बारे में बताया गया है। किताब के मुताबिक, गांधीजी ने ‘रामराज्य’ को एक आदर्श शासन व्यवस्था माना था। उनके रामराज्य में ईमानदारी, पारदर्शिता, लोगों की भलाई और जनता के हित को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया था। यानी शासन का काम सिर्फ सत्ता चलाना नहीं, बल्कि लोगों के लिए काम करना होना चाहिए।
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किताब के ‘शासन और सार्वजनिक नीति’ अध्याय में संस्कृत का एक प्रसिद्ध वाक्य दिया गया है- “प्रजासुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम्।” इसका मतलब है कि राजा की खुशी जनता की खुशी में और उसका हित जनता के हित में है। इसके जरिए छात्रों को बताया गया है कि अच्छे शासन में जनता की खुशी और भलाई सबसे जरूरी होती है।
 

गांधीजी के रामराज्य में क्या खास था?

एनसीईआरटी की किताब के अनुसार, गांधीजी रामराज्य को अच्छे शासन और अच्छे समाज का उदाहरण मानते थे। इसमें ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा और लोगों की भलाई पर जोर था। गांधीजी का रामराज्य किसी खास धर्म की सरकार की बात नहीं करता था, बल्कि ऐसी व्यवस्था की कल्पना करता था जिसमें जनता के हित को प्राथमिकता मिले।

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भारतीय परंपरा में शासन को कैसे देखा गया?

किताब में बताया गया है कि भारतीय परंपरा में शासन को सिर्फ सत्ता चलाने का जरिया नहीं माना गया। वैदिक काल, रामायण और महाभारत के उदाहरणों के जरिए बताया गया है कि शासक की समाज के प्रति भी जिम्मेदारी होती है। उसे लोगों की शांति, सुरक्षा और खुशहाली का ध्यान रखना चाहिए।
 

अच्छे शासन की पहचान क्या थी?

किताब के मुताबिक, अच्छे शासन की पहचान सिर्फ यह नहीं है कि शासक के पास कितनी शक्ति है। यह भी देखा जाता है कि समाज में शांति है या नहीं, लोगों को न्याय मिल रहा है या नहीं और उनकी जिंदगी बेहतर हो रही है या नहीं। यानी जनता की भलाई भी अच्छे शासन का एक जरूरी हिस्सा है।
 

राजधर्म का क्या मतलब है?

किताब में ‘राजधर्म’ के जरिए भी शासन की जिम्मेदारियों को समझाया गया है। आसान भाषा में राजधर्म का मतलब है कि शासक को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना चाहिए। रामायण, महाभारत और वैदिक परंपरा के उदाहरणों से इस विचार को समझाया गया है।
 

नई किताब किस नीति के तहत आई है?

‘समाज को समझना: भारत और उससे आगे-भाग 2’ कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब है। इसे नई शिक्षा नीति 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के तहत तैयार किए जा रहे नए पाठ्यक्रम का हिस्सा बताया गया है। इस किताब का दूसरा भाग मंगलवार को जारी किया गया, जबकि पहला भाग जून में जारी हुआ था।

किताब में कौन-कौन से विषय हैं?

एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के अनुसार, कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र से जुड़े विषय हैं। इसमें कुल छह अध्याय हैं। इन अध्यायों के जरिए छात्रों को भारतीय समाज, शासन, परंपराओं और आज की व्यवस्था के बारे में समझाने की कोशिश की गई है। गांधीजी की रामराज्य की सोच भी इसी का एक हिस्सा है।

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