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Maharashtra: CAS नियमों में बड़ी राहत; महाराष्ट्र में पुराने शिक्षकों को पीएचडी और योग्यता शर्तों से छूट

Thu, 19 Feb 2026 01:43 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

महाराष्ट्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों के लिए करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) में कई पात्रता शर्तें शिथिल कर दी हैं। 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को पीएचडी अनिवार्यता से छूट और नियमित किए गए संविदा शिक्षकों को पूर्व प्रभाव से लाभ मिलेगा।
 
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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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महाराष्ट्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा निदेशालय के अधीन सरकारी और अनुदानित डिप्लोमा व डिग्री संस्थानों के शिक्षकों के लिए करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) की कई पात्रता शर्तों में बड़ी ढील दी है। नए संशोधन के तहत शैक्षणिक, प्रशिक्षण और योग्यता संबंधी नियमों में राहत प्रदान की गई है।

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यह निर्णय बुधवार को जारी सरकारी संकल्प (GR) के माध्यम से लागू किया गया। यह कदम महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण के 7 फरवरी 2025 के आदेश के बाद उठाया गया, जिसमें जून 2022 के जीआर की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आंशिक राहत दी गई थी।

सरकार ने इस मुद्दे की समीक्षा के लिए डॉ. प्रमोद नाइक, संयुक्त निदेशक (तकनीकी शिक्षा, मुंबई क्षेत्र) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति की अक्तूबर 2025 में सौंपी गई सिफारिशों के आधार पर अब CAS के कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

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नियमित किए गए संविदा शिक्षकों को राहत

2015-16 में सरकारी निर्णयों के माध्यम से नियमित किए गए संविदा या अस्थायी व्याख्याताओं को रिफ्रेशर या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2023 तक की समयसीमा दी गई थी। यह विस्तार अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा दिए गए कथित विस्तार के अनुरूप था।

अब जिन शिक्षकों ने निर्धारित समयसीमा तक पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है, उन्हें पूर्व प्रभाव (रेट्रोएक्टिव) से CAS लाभ दिए जाएंगे। जो शिक्षक बाद में पाठ्यक्रम पूरा करेंगे, उन्हें पूर्णता की तिथि से लाभ प्रदान किया जाएगा।

पीएचडी अनिवार्यता से छूट

सरकार ने 5 मार्च 2010 से पहले नियुक्त व्याख्याताओं के लिए CAS के तहत उच्च वेतनमान पे बैंड-4 में पदस्थापन हेतु पीएचडी की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। जून 2022 के जीआर में छठे वेतन आयोग के तहत यह शर्त अनिवार्य की गई थी, जिसे अब पूर्व-2010 नियुक्तियों के लिए हटा दिया गया है।
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विज्ञान और मानविकी संकाय को भी राहत

2003 और 2004 में विज्ञान व मानविकी विषयों में नियुक्त व्याख्याताओं को अब पांचवें वेतन आयोग के समय लागू एमए या एमएससी योग्यता के आधार पर सीएएस लाभ दिया जाएगा, न कि बाद में जोड़े गए उच्च योग्यता मानकों के आधार पर।

इसी प्रकार 2003-04 में नियुक्त संविदा या अस्थायी शिक्षकों को एमई/एमटेक की अनिवार्यता से भी छूट दी गई है। हालांकि 2003-04 के बाद नियुक्त शिक्षकों को वर्तमान जीआर की तिथि से तीन वर्ष के भीतर निर्धारित योग्यता प्राप्त करनी होगी। ऐसा न करने पर लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन योग्यता पूरी करने के बाद वित्तीय लाभ पूर्व प्रभाव से दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त 2015-16 में नियमित किए गए अंग्रेजी विषय के व्याख्याताओं को भी नियुक्ति के समय लागू शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पूर्ण सीएएस लाभ देने की अनुमति दी गई है, न कि बाद में लागू कठोर मानकों के अनुसार।
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