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जानिए देश की अफसरशाही के बारे में: किस पर पद मिलते हैं क्या अधिकार

Fri, 08 Jan 2021 06:41 PM IST
Devesh Devesh एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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देश की अफसरशाही - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत की प्रशासनिक सेवाओं को देश की सबसे अहम सरकारी सेवा विभाग माना जाता है। इसमें चयन संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE - Civil Service Examination) के माध्यम से होता है। इसी परीक्षा से आईएएस, आईएफएस, आईपीएस बनते हैं। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में शामिल भी होते हैं, लेकिन कुछ की ही मेहनत सफल हो पाती है और वे चयनित हो पाते हैं। भारत सरकार के करीब 24 सेवा विभागों में संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा के जरिये नियुक्तियां होती हैं। आइए जानते हैं सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद क्या-क्या हैं विकल्प, कौनसा पद है ज्यादा ताकतवर और किसे मिलती है सबसे ज्यादा तनख्वाह ... 
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2017 बैच के आईएएस अधिकारी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
सिविल सेवा परीक्षा : 
  1. भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)
  2. भारतीय विदेश सेवा (IFS)
  3. भारतीय पुलिस सेवा (IPS)
  4. भारतीय राजस्व सेवा ग्रुप ए  (कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज) (IRS)
  5. भारतीय राजस्व सेवा (आईटी) ग्रुप ए
  6. भारतीय डाक सेवा ग्रुप ए
  7. भारतीय सूचना सेवा (जूनियर ग्रेड) ग्रुप ए
  8. इंडियन पी एंड टी अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस ग्रुप ए
  9. इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स सर्विस ग्रुप ए
  10. इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस ग्रुप ए
  11. इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज सर्विस ग्रुप ए
  12. इंडियन सिविल अकाउंट्स सर्विस ग्रुप ए
  13. इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस ग्रुप ए
  14. इंडियन रेलवे अकाउंट्स सर्विस ग्रुप ए
  15. इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस ग्रुप ए
  16. रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर का पद
  17. इंडियन डिफेंस एस्टेट सर्विस ग्रुप ए
  18. इंडियन ट्रेड सर्विस ग्रुप ए (ग्रेड-3)
  19. इंडियन कॉर्पोरेट लॉ सर्विस ग्रुप ए
  20. सशस्त्र सेना मुख्यालय सिविल सर्विस ग्रुप बी (सेक्शन ऑफिसर्स ग्रेड)
  21. दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन दीव और दादर नागर हवेली सिविल सेवा (प्रशासनिक) ग्रुप बी
  22. दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन दीव और दादर नागर हवेली पुलिस सेवा ग्रुप बी
  23. पुडुचेरी प्रशासनिक सेवा ग्रुप बी
  24. पुडुचेरी पुलिस सेवा ग्रुप बी 
आदि में नियुक्ति सिविल सेवा परीक्षा से मिलती है।
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ias interview 2020 - फोटो : amar ujala
शीर्ष रैंक वाले ही बनते हैं आईएएस : 
इस परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवार ही आईएएस अधिकारी बन पाते हैं। आईएएस यानी इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस से ही ब्यूरोक्रेसी यानी नौकरशाही में प्रवेश होता है। आईएएस में चयनित अभ्यर्थी विभिन्न मंत्रालयों में सचिव, विभागों या जिलों के प्रशासनिक अधिकारी/ जिलाधिकारी/ कलेक्टर बनते हैं। एक आईएएस अधिकारी ही भारतीय नौकरशाही के सबसे बड़े पद कैबिनेट सचिव तक भी पहुंच सकता है। मंत्रालयों में सचिव, उप सचिव, सहायक सचिव, अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पद आईएएस अधिकारी को ही मिलते हैं। 

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IAS Training - फोटो : amar ujala
प्रशिक्षण व्यवस्था : 
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) तथा भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की शुरुआती तीन महीने की ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ही होती है। इसे फाउंडेशन कोर्स के तौर पर जाना जाता है। इसके बाद आईपीएस प्रशिक्षु अधिकारियों को आगे के प्रशिक्षण के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA), हैदराबाद भेजा जाता है। यहां उन्हें पुलिस की मुश्किल ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें घुड़सवारी, परेड, हथियार चलाना सिखाया जाता है।  
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आईपीएस-अलंकृता सिंह - फोटो : Amar Ujala
ड्रेस कोड, अंगरक्षक और सम्मान  : 
आईएएस अधिकारियों का कोई ड्रेस कोड निर्धारित नहीं होता है। हालांकि, रैंक के अनुसार वे अपने स्तर पर इच्छानुसार, फॉर्मल ड्रेस और कोट पहनते हैं। वहीं, एक आईपीएस अधिकारी हमेशा ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनते हैं। कभी-कभार ही वे फॉर्मल ड्रेस में नजर आते हैं। सुरक्षा और पद वरीयता के लिहाज से एक आईएएस अधिकारी के साथ दो या तीन अंगरक्षक मिलेंगे। वहीं एक आईपीएस के साथ उसके पद वरीयता प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस एस्कॉर्ट रहती है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी आईएएस अधिकारी को एक मेडल दिया जाता है और आईपीएस अधिकारी को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है। 
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IAS-IPS - फोटो : SELF
आईएएस या आईपीएस कौन ज्यादा पावरफुल : 
आईएएस और आईपीएस दोनों ही सेवाओं का स्तर बेहद सम्मानजनक होता है और दोनों ही बहुत शक्तिशाली पद हैं। हालांकि, आईएएस एक डीएम जिलाधिकारी के तौर पर काफी ज्यादा शक्तिशाली होता है। जिलाधिकारी के रूप में वह जिले के पुलिस विभाग के साथ-साथ जिले के सभी विभागों का प्रशासनिक मुखिया भी होता है। जबकि एक आईपीएस के पास केवल अपने विभाग की जिम्मेदारी होती है। आईपीएस अधिकारी बतौर पुलिस अधीक्षक या पुलिस कमिश्नर क्षेत्र में पुलिस, कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण का कामकाज संभालते हैं। वहीं, लोक प्रशासन और नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए आईएएस जिम्मेदार होता है, यानी सरकार जो नीतियां बनाती है उन्हें लागू करवाने काम एक आईएएस अधिकारी का होता है।  
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Union Home Secretary Ajay Bhalla at CRPF HQ - फोटो : Amar Ujala
शक्तियों को ऐसे समझें : 
एक राज्य में आईपीएस का सबसे बड़ा पद डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक का होता है और आईएएस श्रेणी में उस राज्य का मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) शीर्ष अधिकारी होता है। ये दोनों पद एक-दूसरे के समकक्ष श्रेणी के हैं। दोनों ही राज्य के मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। मुख्य सचिव राज्य की सभी प्रशासनिक सेवाओं के लिए उत्तरदायी होता है जबकि डीजीपी राज्य में कानून व्यवस्था और लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी संभालते हैं। विशेष मामलों में मुख्य सचिव डीजीपी से रिपोर्ट तलब कर सकते हैं, लेकिन मुख्य सचिव डीजीपी के बॉस नहीं होते हैं। आईएएस कैडर का नियंत्रण कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय करता है तो वहीं, आईपीएस कैडर का नियंत्रण गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है। 

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डेमो पिक
किसे कितनी तनख्वाह : 
आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को काफी बेहतरीन वेतन मिलता है। वेतन के अलावा कई प्रकार की भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं। सातवें वेतन आयोग के अनुसार आईएएस अधिकारी की बेसिक सैलरी 56,100 रुपए महीना होती है। टीए-डीए जैसे भत्तों को गिने तो नौकरी की शुरुआत में ही एक आईएएस अधिकारी को वेतन एक लाख रुपए से ज्यादा होता है। जबकि शीर्ष पद चीफ सेक्रेटरी के लिए करीब 2,50,000 तक पहुंच जाती है। वहीं, अगर आईपीएस अधिकारी कैडर की बात करें तो यहां भी वेतन में आईएएस कैडर के मुकाबले थोड़ा सा कम होता है। आईपीएस अधिकारी का बेसिक वेतन 56,100 रुपए प्रति माह से शुरू होता है, जो पदोन्नति के साथ 2,25,000 रुपए प्रति माह तक पहुंच जाता है। इन्हें भी वेतन के अलावा कई प्रकार की भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं। 

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आईएएस ओपी पटेल (फाइल फोटो)
मिलती हैं तमाम सुविधाएं : 
गौरतलब है कि प्रशासनकि अधिकारियों को वेतन स्केल के आधार पर होता है, जैसे- जूनियर स्केल, सीनियर स्केल, सुपर टाइम स्केल, इसके अलावा वेतनमानों में अलग-अलग वेतन बैंड भी होते हैं। इन अधिकारियों को तमाम सुविधाएं जैसे बंगला, कुक, चपरासी और स्टाफ शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें दूरभाष, यात्राएं भी फ्री होती हैं। याद रहे कि देश में नौकरशाही में सबसे ज्यादा सैलरी सचिव स्तर के अधिकारी को मिलती है। सबसे बड़ा पद भी केंद्रीय कैबिनेट सचिव का होता है। 

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इब्सा के विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर - फोटो : एएनआई
भारतीय विदेश सेवा (IFS) :
भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसे अन्य प्रमुख की तरह ही भारत की सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सेवाओं में से एक है। सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद आईएफएस अधिकारी बनने के लिए तीन साल तक प्रशिक्षण लेना पड़ता है। पहले लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (मसूरी) और फिर विदेश सेवा संस्थान (दिल्ली) में प्रशिक्षण हो मिलता है। इस सेवा में वहीं जा सकते हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी या अन्य किसी विदेशी भाषा में पारंगत हों। आईएफएस अधिकारी विदेश मंत्रालय, दुनियाभर में स्थित भारतीय दूतावास, भारतीय उच्चायोग, महा वाणिज्य दूतावास और संयुक्त राष्ट्र में तैनात होते हैं। ये अधिकारी विदेशों में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

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Indian Diplomat Paulomi Tripathi - फोटो : ANI
आईएफएस के कार्य : 
आईएफएस अधिकारी के अहम कार्यों में भारत के हितों की रक्षा करना, विदेशी सरकारों से मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना। जिस देश में वे तैनात हैं वहां की सरकार के कामकाज, विकास की रिपोर्टिंग करना। सरकार से विभिन्न समझौतों पर बातचीत करना। दोनों देशों के बीच सम्मानजनक सुविधाओं का विस्तार करना, वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की चिंता करना आदि प्रमुख काम शामिल हैं। आईएफएस अधिकारी डिप्लोमेसी से जुड़े मामलों में काम करते हैं और द्विपक्षीय मामलों को हैंडल करते हैं। बतौर राजनयिक ये अधिकारी विभिन्न मुद्दें जैसे राजनीतिक और आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश प्रोत्साहन व सांस्कृतिक संबंध आदि मामलों को देखते हैं। 
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आईएफएस तरनजीत सिंह संधू - फोटो : Social Media
आईएफएस का रुतबा  : 
आईएफएस अधिकारी की गाड़ी की नंबर प्लेट नीले रंग की होती है। इस तरह की नंबर प्लेट किसी ओर को अधिकारी को नहीं मिलती। आईएफएस अधिकारी अदालत में गवाह के रुप में पेस होने से प्रतिरक्षा प्राप्त होती हैं। उन्हें नागरिक या प्रशासनिक अदालत में गवाही के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कई देशों में पुलिस और कानूनी नियमों से भी प्रतिरक्षा प्राप्त होती है। यात्राओं के दौरान ये अपने व्यक्तिगत सामान के निरीक्षण से भी छूट प्राप्त कर सकते हैं। आईएफएस को किसी भी प्रकार से गिरफ्तार या हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। उनकी, उनके परिवार और घर की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती है। आईएफएस अधिकारियों को अपने कार्यों के निर्वहन के लिए संचार की स्वतंत्रता होती है। वेतन की बात करें तो एक आईएफएस अफसर को लगभग 80 हजार से 2,25,000 रुपए प्रति माह तक मिलती है। सुविधाएं भी बाकी की प्रशासनिक सेवाओं की तरह मिलती हैं। 
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