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सरकार इस क्षेत्र को बढ़ाने के लिए उठा रही है अनेकों कदम, यहां करियर बनाना होगा फायदेमंद

Sat, 14 Sep 2019 10:29 AM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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हमारा देश, वनों की अधिकता के कारण वन्य जीवों से भरा पड़ा है। यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि भारत दुनिया के बारह मेगा जैव विविधता संपन्न देशों में शामिल है। हमारे देश का वन्य जीव पूर्वोत्तर भारत के सदाबहार वनों से लेकर हिमालय के हरे-भरे जंगलों तथा पश्चिमी घाटों तक फैला हुआ है। इसे देखते हुए वन्य जीव संरक्षण विज्ञान (वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन साइंस) में करियर की उजली संभावनाएं निर्मित हो गई हैं।

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गौरतलब है कि वन्य जीव के अंतर्गत ऐसे प्राणी या जलीय जीव आते हैं जो किसी तरह के प्राकृतिक अधिवास में रहते हैं। वर्तमान समय में वन्य जीव तथा वन्य जीवन के लिए भारी खतरा उत्पन्न हो गया है। इनमें प्रमुख हैं- वन्य जीवों का शिकार, उनकी शरणस्थली का नष्ट होना, दुर्घटनाएं तथा वन्य जीवों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां। इसे देखते हुए इन सभी परेशानियों को वैज्ञानिक ढंग से हल करना बहुत आवश्यक हो गया है। इसी के चलते वन्य जीव संरक्षण विज्ञान का विकास हुआ है। इससे संबंधित जानकारी पढ़ते हैं आगे...

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वन्य जीव संरक्षण विज्ञान में उजला करियर बनाने हेतु वन्य जीवों के प्रति लगाव, पूर्ण समर्पण तथा साहसिक कार्यों के लिए सक्षम होना अति आवश्यक है। गौरतलब है कि सरकार ने देश में वनों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए समय-समय पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार द्वारा किए जा रहे वित्तीय और अन्य निवेश से स्थानीय समुदायों, गैर सरकारी संगठनों द्वारा पर्यावरणीय व्यवस्था में मौजूदा वन्य जीवों का संरक्षण किया जा रहा है। वन्य जीव संरक्षण विज्ञान पाठ्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य ऐसे वन्य जीव संरक्षक विशेषज्ञ तैयार करना है जो कि वन्य जीवों और उनके आवासों के संरक्षण तथा उन्नयन को वैज्ञानिक ढंग से अंजाम दे सकें। 

वन्य जीव संरक्षण विज्ञान के क्षेत्र में प्रमुख करियर विकल्प इस प्रकार हैं-
वन्य जीव संरक्षक- वन्य जीव संरक्षक प्राकृतिक संसाधनों को उन सिद्धांतों के साथ जोडकर कार्य करते हैं जिससे उन्हें उच्चतम सामाजिक तथा आर्थिक लाभ सुनिश्चित हो सकें। 

वन्य जीव वैज्ञानिक- 

वन्य जीव वैज्ञानिक पारिस्थितिकी, गणना, व्यवहार और शरीर विज्ञान, वन्य जीवों के रोगों, वन्य जीव बंदी और रोकथाम, - पशु आवास, प्रजनन,पुनर्वास, फोरेंसिक,संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करते हैं और नई-नई खोज करते हैं। योग्य कार्मिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से पशुओं की उन प्रजातियों की स्थिति का मूल्यांकन तथा उसमें सुधार के उपाय किए जा सकते हैं जो इस समय लुप्त होने की कगार पर हैं। 

वन्य जीव परिस्थितिकी विज्ञानी- 

वन्य जीव पारिस्थितिकी विजानी इस बात का अध्ययन करते हैं कि जीवों का उनके पर्यावरण से क्या संबंध है तथा किस प्रकार से वे उससे प्रभावित होते हैं। 

वन्य जीव फोरेंसिक विशेषज्ञ- 

वन्य जीव फोरेंसिक विशेषज्ञों का काम वन्य जीव अपराध से जुड़े मामलों में पशुओं की मृत्यु के कारण, प्रजाति, आयु तथा लिंग आदि के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करना है। 

वन्य जीव प्रबंधक-

वन्य जीव प्रबंधक वन्य जीवों और उनके आवासों पर वैज्ञानिक और तकनीकी सिद्धांतों का अनुप्रयोग करते हैं ताकि वन्य जीवन की संख्या को विहार एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए बरकरार रखा जा सके। 

वन्य जीव सलाहकार- 

यह वन्य जीव विशेषज्ञ होते हैं जो केंद्र तथा राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, अनसंधान संस्थानों तथा अन्य सरकारी तथा गैर सरकारी एजेंसियों को परामर्शी सेवाएं प्रदान करते हैं।

वन्य जीव शिक्षक- 

वाइल्ड लाइफ साइसम अपन ज्ञान का विस्तार करने के इच्छक व्यक्ति कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, वन्य जीव संस्थानों आदि में सहायक प्रोफेसर/प्रवक्ता के रूप में करियर शुरू कर सकत है। ऐसे व्यक्ति वाइल्ड लाइफ साइंस में शोध कार्य भी कर सकते हैं तथा वन्य जीव विज्ञान में योगदान देते हैं।

प्रमुख संस्थान :

  • भारतीय वन्य जीव संस्थान, चंद्रबणी, देहरादून 
  • कुवेम्पु विश्वविद्यालय, शिमोगा, कर्नाटक 
  • वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून 
  • राष्ट्रीय जैविक विज्ञान केंद्र, बेंगलुरू 
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ 
  • गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.) 
  • वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल 
  • डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला, (महाराष्ट्र)
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