एक रिपोर्ट के अनुसार मासिक धर्म अवकाश और मातृत्व अवकाश के प्रावधान को ध्यान में रखते हुए सिंडीकेट की बैठक में प्रत्येक सेमेस्टर में परीक्षा में बैठने के लिए छात्राओं की न्यूनतम उपस्थिति 73 प्रतिशत करने का निर्णय लेने के बाद यह घोषणा की गई। यूनिवर्सिटी सिंडिकेट की एनुअल मीटिंग की अध्यक्षता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मोहनम कुन्नुम्मल ने की।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि गर्भावस्था के कारण छह महीने की छुट्टी के बाद, महिलाएं अपने पाठ्यक्रम में दोबारा प्रवेश लिए बिना अपने कॉलेज में शामिल हो सकती हैं। इसके लिए उन्हें अपने चिकित्सा दस्तावेज जमा करने होंगे, जिन्हें कॉलेज के प्राचार्यों द्वारा सत्यापित किया जाएगा। यूनिवर्सिटी सिंडिकेट के अंडर आने वाले कॉलेज के प्रिंसिपल मेडिकल सर्टिफिकेट चेक करने के बाद स्टूडेंट्स को क्लास में शामिल होने की परमिशन दे सकते हैं।
देश में पहली बार, केरल के एक विश्वविद्यालय ने अपने यहां अध्ययनरत छात्राओं के लिए मासिक धर्म यानी माहवारी का अवकाश (Menstrual Leave) देने की घोषणा की है। दरअसल, कोचिन विश्वविद्यालय ने छात्राओं को मासिक धर्म की छुट्टी देने का फैसला किया है। कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CUSAT) ने विश्वविद्यालय के छात्र संघ से मिले प्रतिनिधित्व के बाद यह निर्णय किया है। विश्वविद्यालय की ओर से 11 जनवरी, 2023 को जारी अवकाश संबंधी आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने प्रत्येक सेमेस्टर में छात्राओं की उपस्थिति में कमी को लेकर दो प्रतिशत अतिरिक्त छूट देने का फैसला किया है। यह कदम शिक्षा को संवेदनशील बनाने और महिलाओं तक शिक्षा की पहुंच को आसान बनाने के एक हिस्से के रूप में आया है। इससे पहले, राज्य ने केरल में छात्राओं के लिए 60 दिनों के मातृत्व अवकाश की अनुमति दी थी।
केरल में कई विश्वविद्यालय अपने छात्रों के लिए मातृत्व और मासिक धर्म अवकाश का प्रावधान शुरू कर रहे हैं। जनवरी में, कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीयूएसएटी) ने अपने छात्र संघ द्वारा मांग उठाए जाने के बाद अपनी महिला छात्रों को मासिक धर्म की छुट्टी की अनुमति दी थी। जनवरी में, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के तहत सभी संस्थानों में सभी छात्राओं को मासिक धर्म और मातृत्व अवकाश प्रदान करने वाला केरल देश का पहला देश बन जाएगा।