शिवनकुट्टी ने जताई हैरानी
वामपंथी नेता शिवनकुट्टी ने इस घटना पर हैरानी जताई और कहा कि राज्य सरकार इसे अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा, “शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक चेतना और प्रगतिशील सोच को बढ़ावा देना है। इस तरह की गतिविधियां हमारे शिक्षा तंत्र के बुनियादी उद्देश्यों को ही कमजोर करती हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा वह अधिकार है जो जाति व्यवस्था के नाम पर अशिक्षा थोपे जाने के दौर से संघर्ष करके हासिल किया गया है। उन्होंने चेताया, “इस अधिकार को किसी के पैरों तले कुचलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस प्रकार की गतिविधियों को दोबारा न होने देने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
शिवनकुट्टी ने यह स्पष्ट किया कि सामान्य शिक्षा विभाग को अधिकार है कि वह किसी भी सिलेबस से जुड़े स्कूल पर कार्रवाई करे, यदि वह ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ और उसके नियमों का पालन नहीं करता है।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ ने भी की आलोचना
इस बीच, सत्तारूढ़ दल माकपा की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने भी शनिवार को इस रस्म की कड़ी आलोचना की। SFI के राज्य अध्यक्ष एम. शिवप्रसाद ने बयान जारी कर कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से नियंत्रित स्कूलों में हुआ है और बच्चों से सेवानिवृत्त शिक्षकों के पैर धुलवाना न केवल निंदनीय है बल्कि अस्वीकार्य भी।
उन्होंने इसे समाज में “चातुर्वर्ण्य व्यवस्था थोपने का एजेंडा” करार दिया और कहा कि यह एक “असभ्य” कृत्य है जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की।