छात्रा की याचिका को खारिज करते हुए केरल सरकार ने कहा कि राज्य पुलिस के कार्यक्रम में इस तरह की छूट से राज्य में धर्मनिरपेक्षता पर काफी असर पड़ेगा। अपने आदेश में, राज्य के गृह विभाग ने कहा कि सरकार, उसके प्रतिनिधित्व की सावधानीपूर्वक जांच के बाद पूरी तरह से संतुष्ट है कि याचिकाकर्ता की मांग विचारणीय नहीं है।
साथ ही, यदि छात्र पुलिस कैडेट परियोजना में इस तरह की छूट पर विचार किया जाता है, तो इसी तरह की मांग अन्य समान बलों पर की जाएगी, जो राज्य की धर्मनिरपेक्षता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगी। इसलिए इस तरह का कोई संकेत देना उचित नहीं है। छात्र-छात्राएं, पुलिस कैडेट परियोजना के तहत वर्दी में विशेष धार्मिक पोशाक को नहीं पहन सकते।
इससे पहले, छात्र पुलिस कैडेट विभाग ने उसे सूचित किया कि प्रोजेक्ट में इस्लामी मान्यताओं के अनुसार सिर पर दुपट्टा और पूरी बांह की पोशाक पहनने की अनुमति नहीं होगी, इसके बाद छात्रा ने अदालत का रुख किया था। छात्रा ने केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर, छात्र पुलिस कैडेट वर्दी में पूरी बाजू की शर्ट और हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। जिसे कोर्ट के द्वारा खारिज कर दिया गया था।
हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया था कि वह रिट याचिका में उठाई गई अपनी शिकायत के बारे में सरकार के समक्ष एक अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र है। इसके बाद छात्रा ने उच्च न्यायालय के फैसले के अनुपालन में राज्य सरकार के समक्ष याचिका दायर की थी।