गहलोत ने राष्ट्रीय पहलों जैसे 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'स्वच्छ भारत मिशन' में NSS स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कर्नाटका के पांच लाख से अधिक NSS स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए पुरस्कार प्राप्त करने वालों को उनके समर्पण और सेवा के लिए बधाई दी।
40 हजार स्वयंसेवकों के साथ शुरू हुआ था एनएसएस
उन्होंने एनएसएस की विरासत पर भी प्रकाश डाला और कहा कि 1969 में 40,000 स्वयंसेवकों के साथ शुरू हुआ यह कार्यक्रम आज विश्व के सबसे बड़े युवा स्वयंसेवी संगठनों में से एक बन गया है। राज्यपाल ने एनएसएस के आदर्श वाक्य "नॉट मी, बट यू" को पुनः रेखांकित किया, जो नि:स्वार्थ सेवा और दूसरों के प्रति सहानुभूति की भावना को दर्शाता है।
स्वामी विवेकानंद के एक और उद्धरण का उल्लेख करते हुए गहलोत ने छात्रों से कहा, "उठो, जागो और तब तक मत रुकिए जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" उन्होंने छात्रों को स्वामी विवेकानंद के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेने और देश की सेवा में 'जिम्मेदार नागरिक' बनने की सलाह दी।
समारोह में कुल 48 पुरस्कार दिए गए, जिनमें दो सर्वोत्तम विश्वविद्यालयों/निर्देशालयों, दो सर्वोत्तम NSS कार्यक्रम समन्वयकों, 12 सर्वोत्तम NSS इकाइयों, 12 NSS कार्यक्रम अधिकारियों और 20 सर्वोत्तम NSS स्वयंसेवकों को उनकी असाधारण प्रतिबद्धता औरएनएसएस गतिविधियों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।