फौजिया खान ने कहा, "भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है, लेकिन फिर भी हमारे पास स्कूल परिवहन सुरक्षा पर एक राष्ट्रीय नीति नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि कुछ राज्यों ने स्कूल वाहनों, जैसे बसों और वैन के लिए मानक नीति बनाई है, लेकिन यह ज्यादातर कागजों तक ही सीमित रहती है और इसका प्रभावी पालन नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त खान ने यह भी उल्लेख किया कि बच्चों को ले जाने वाले ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा के लिए सुरक्षा उपायों और नियमों का अभाव है।
राष्ट्रीय स्कूल परिवहन नीति की अपील
फौजिया खान ने कहा "इन समस्याओं को हल करने के लिए, मैं सरकार से अपील करती हूं कि एक राष्ट्रीय स्कूल परिवहन नीति तैयार की जाए, जो सभी राज्यों में समान सुरक्षा नियमों को लागू करे। इस नीति में सीट बेल्ट, CCTV कैमरे और GPS जैसे उपकरणों की अनिवार्यता होनी चाहिए। इन नियमों को निजी स्कूलों और अन्य परिवहन विकल्पों जैसे ऑटो, वैन और रिक्शा पर भी लागू किया जाए, ताकि सभी स्कूल वाहनों में एक समान सुरक्षा मानक लागू हो सके।"
उन्होंने स्कूल परिवहन सुरक्षा के मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने की भी अपील की, जिसमें स्पीड लिमिट, ओवरक्राउडिंग जैसे मुद्दे शामिल हैं। खान ने यह भी सुझाव दिया कि सभी स्कूल वाहनों में सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और सुरक्षा ऑडिट किया जाना चाहिए, और इसे एक मानक प्रक्रिया के रूप में लागू किया जाए।
ग्रिवेंस रीड्रेसल और ड्राइवर ट्रेनिंग की आवश्यकता
इसके साथ ही, फौजिया खान ने स्कूलों से अपील की कि वे एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करें और यह सुनिश्चित करें कि स्कूल वाहन चालकों को नियमित रूप से प्रशिक्षण और संवेदनशीलता बढ़ाने की प्रक्रिया में भाग लिया जाए। इस पहल के जरिए खान ने स्कूल परिवहन सुरक्षा को लेकर एक ठोस और प्रभावी नीति की जरूरत को स्पष्ट किया, जो देशभर में समान रूप से लागू हो और बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करे।