गुजरात एटीएस के एक अधिकारी ने कहा कि जनवरी में लीक का पता चलने के बाद इससे पहले एजेंटों और बिचौलियों सहित 19 लोगों को धोखाधड़ी, आपराधिक अपराधों और अन्य अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया था और वे अब भी सलाखों के पीछे हैं। एटीएस के अनुसार पेपर लीक के सिलसिले में जनवरी में वडोदरा के एक कंप्यूटर सेंटर पर छापे के दौरान सात महिलाओं सहित इन 30 उम्मीदवारों के कॉल लेटर, ब्लैंक चेक और मूल दस्तावेज जब्त किए गए थे। इनके सत्यापन और जांच के बाद गुरुवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
एटीएस अधिकारी ने बताया कि ये 30 व्यक्ति पेपर लीक में शामिल लोगों को 12 लाख रुपये से 15 लाख रुपये के बीच भुगतान करने के लिए सहमत हुए थे, और ब्लैंक चेक और मूल प्रमाण पत्र गारंटी के रूप में जमा किए गए थे। इनमें से अधिकतर उम्मीदवार मेहसाणा, अरावली, खेड़ा, दाहोद, साबरकांठा, गांधीनगर, छोटाउदेपुर और महिसागर जैसे उत्तरी और मध्य गुजरात जिलों से हैं।
अधिकारी ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर एटीएस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया था और 29 जनवरी की तड़के प्रश्न-पत्र की एक प्रति बरामद की थी, जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। पकड़े गए लोगों में ओडिशा के मूल निवासी, तेलंगाना के हैदराबाद में एक प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी, वडोदरा शहर के दो निवासी, जिनमें एक कंप्यूटर सेंटर संचालित करने वाला भी शामिल है, जिस पर 29 जनवरी की तड़के लीक जांच के तहत छापा मारा गया था। पुलिस के अनुसार, छापेमारी के समय 15 लोगों को पकड़ा गया था, जबकि चार आरोपियों को कुछ समय बाद पकड़ा गया था।