JU Ragging Case: जादवपुर यूनिवर्सिटी छात्र रैगिंग मामले में हर दिन नया मोड़ आ रहा है। आज, यानी मंगलवार को भाजपा विधायकों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में जादवपुर विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष के छात्र की कथित तौर पर रैगिंग और यौन उत्पीड़न के बाद हुई मौत पर सदन से वॉकआउट किया और कहा कि विश्वविद्यालय परिसर अब ''राष्ट्र-विरोधी तत्वों का केंद्र'' बन गया है। उनका कहना है कि अब केवल एनआईए जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है, क्योंकि राज्य सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।
इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव (Adjournment motion) लाने वाले भाजपा विधायक दल ने शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु से जवाब मांगा। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने पूछा "राज्य सरकार ने जेयू में स्थिति को नियंत्रित करने, राष्ट्र-विरोधी तत्वों और ड्रग्स की कमर तोड़ने के लिए क्या कार्रवाई की है?"
इसके जवाब में बसु ने जादवपुर विश्वविद्यालय की स्थिति के लिए राज्यपाल सीवी आनंद बोस को दोषी ठहराया, जिसके बाद भाजपा विधायकों ने टीएमसी सरकार के खिलाफ नारे लगाना शुरू कर दिया। बाद में विपक्षी विधायक मंत्री से असहमत होकर सदन से बाहर चले गये।
बसु ने कहा, "स्थिति के लिए राज्यपाल पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। ऐसा नहीं है कि रैगिंग जैसी समस्या केवल जेयू में हो रही है। ऐसी घटनाएं आईआईटी खड़गपुर जैसे केंद्रीय संस्थानों में भी हुई हैं।" जादवपुर विश्वविद्यालय कथित तौर पर रैगिंग और यौन उत्पीड़न के बाद एक फ्रेशर स्टूडेंट की मौत को लेकर आलोचनाओं के घेरे में है।
17 वर्षीय स्नातक छात्र की 9 अगस्त को लड़कों के मेन हॉस्टल की दूसरी मंजिल की बालकनी से गिरने के बाद मौत हो गई। छात्र के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि उनका लड़का रैगिंग और यौन उत्पीड़न का शिकार था। छात्र की मौत के मामले में जेयू के छात्रों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।