आंतरिक समिति की जांच के बाद कार्रवाई
विश्वविद्यालय के आदेश में कहा गया है कि प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच आंतरिक समिति ने की थी। समिति ने अपने निष्कर्षों के आधार पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित के हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा गया है, "उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए, सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने और आंतरिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर, विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्तगी की सजा सुनाई जाती है।"
आदेश में कार्रवाई के लिए सेवा संबंधी नियमों और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के नियम 11(ix) का उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय ने इसी प्रावधान के तहत प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का आदेश जारी किया है।