जेएनयू प्रशासन और भारतीय ज्ञान परंपरा धरोहर गठबंधन की ओर से आयोजित इस सम्मेलन को आयुष मंत्रालय, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद का सहयोग प्राप्त है।
सम्मेलन का उद्देश्य
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह सम्मेलन ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से विश्व के अन्य देशों ने अपने विकास के लिए अपनी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधार बनाया, उसी तरह भारत को भी अपने बौद्धिक मूल्यों की ओर लौटने की आवश्यकता है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को इसी दिशा में एक मजबूत कदम बताया।
समापन सत्र में असम के मुख्यमंत्री होंगे शामिल
सम्मेलन में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रो. मुंजल भार्गव, प्रो. कपिल कपूर और प्रो. दर्शन शंकर जैसी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हस्तियां मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। समापन सत्र में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। कुलपति ने यह भी जानकारी दी कि इस सम्मेलन की एक बड़ी विशेषता पूर्वोत्तर भारत के शैक्षणिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को केंद्र में रखना है।
उन्होंने बताया कि जेएनयू ने विभिन्न राज्यों से कोरपस फंड प्राप्त किया है, जिनमें असम भी शामिल है । इसी फंड के ब्याज से करीब 10 करोड़ की लागत से आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में विद्वानों, शोधार्थियों व नीति निर्माताओं को एक साझा मंच मिलेगा, जहां वे भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा, उद्योग, सरकार और समाज में कैसे सार्थक रूप से शामिल किया जा सकता है।
100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे
इस तीन दिवसीय आयोजन में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, साथ ही संवाद सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। कुलपति ने कहा कि यह सम्मेलन भविष्य में एक वार्षिक परंपरा बनेगा, जो भारत की बौद्धिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम बनेगा। सम्मेलन का दीर्घकालिक लक्ष्य पूर्वोत्तर भारत को मुख्यधारा के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विमर्शों से जोड़ना है।