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JNU PG Admission: डिप्रिवेशन प्वाइंट पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, क्या अब दाखिले फिर होंगे? जानें पूरा मामला

Tue, 18 Aug 2026 06:04 PM IST
Akash Kumar एएनआई, नई दिल्ली

सार

JNU PG Admission 2026: दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जेएनयू के पीजी दाखिलों पर लगी रोक में बदलाव कर दिया है। अब विश्वविद्यालय डिप्रिवेशन प्वाइंट के आधार पर दाखिले आगे बढ़ा सकता है, लेकिन सभी प्रवेश लंबित याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।
 
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, JNU - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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JNU PG Admission 2026: दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के 2026-27 शैक्षणिक सत्र के पीजी दाखिलों को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने पहले लगाए गए अंतरिम रोक के आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि जेएनयू अपने 2026-27 ई-प्रॉस्पेक्टस के अनुसार दाखिले जारी रख सकता है। इसमें डिप्रिवेशन प्वाइंट की व्यवस्था भी शामिल है, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।

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हालांकि, इन दाखिलों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिप्रिवेशन प्वाइंट के तहत होने वाले सभी दाखिले लंबित रिट याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगे।

डिवीजन बेंच ने क्या आदेश दिया?

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने पहले दिए गए अंतरिम आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने:
  • जेएनयू को डिप्रिवेशन प्वाइंट के साथ दाखिले जारी रखने की अनुमति दी।
  • सभी दाखिलों को लंबित रिट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रखा।
  • एकल न्यायाधीश से मामले की सुनवाई में तेजी लाने और याचिका का जल्द फैसला करने का अनुरोध किया।

डिप्रिवेशन प्वाइंट को लेकर विवाद क्या है?

विवाद जेएनयू के 2026-27 ई-प्रॉस्पेक्टस के सेक्शन V से जुड़ा है। इसके तहत उम्मीदवारों को अधिकतम 12 डिप्रिवेशन प्वाइंट दिए जा सकते हैं।

इन प्वाइंट का आधार कई कारक हैं। इनमें उम्मीदवार की पिछली स्कूली शिक्षा की भौगोलिक स्थिति भी शामिल है। इस व्यवस्था में:
 
डिप्रिवेशन प्वाइंट अंक के बराबर
1 प्वाइंट 3 अंक
अधिकतम 12 प्वाइंट अधिकतम 36 अंक
 

पहले एकल पीठ ने रोक क्यों लगाई थी?

14 अगस्त को न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह ने जेएनयू को डिप्रिवेशन प्वाइंट के आधार पर दाखिले अंतिम रूप से पूरा करने से रोक दिया था। एकल पीठ ने प्रथम दृष्टया माना था कि यह व्यवस्था उम्मीदवारों को CUET में मिले अंकों को प्रभावित करती हुई दिखाई देती है।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि इससे प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता और उसकी मूल भावना प्रभावित हो सकती है। इसी अंतरिम आदेश के बाद जेएनयू की दाखिला प्रक्रिया पर रोक जैसी स्थिति बन गई थी।

डिवीजन बेंच ने रोक में बदलाव क्यों किया?

डिवीजन बेंच ने जेएनयू की ओर से रखे गए कई पहलुओं पर ध्यान दिया। विश्वविद्यालय ने बताया कि डिप्रिवेशन प्वाइंट की व्यवस्था 1974 से लागू है। समय-समय पर इसमें बदलाव किए गए हैं और इसे विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल ने मंजूरी दी है।

बेंच ने यह भी ध्यान में रखा कि अंतरिम आदेश के कारण पूरी दाखिला प्रक्रिया रुक गई थी। जेएनयू की दाखिला प्रक्रिया पहले ही काफी आगे बढ़ चुकी थी कोर्ट ने दाखिला प्रक्रिया की समय-सीमा का भी उल्लेख किया।
  • जेएनयू ने 3 अप्रैल 2026 को ई-प्रॉस्पेक्टस जारी किया था।
  • दाखिला प्रक्रिया मई 2026 में शुरू हुई।
  • पहले चरण की काउंसलिंग 25 जून को पूरी हो गई थी।
  • पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्रों की कक्षाएं 30 जुलाई से शुरू हो चुकी थीं।

ऐसे में डिवीजन बेंच ने दाखिला प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी, लेकिन इसे अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन रखा।

याचिकाकर्ता ने क्या तर्क दिया?

पीजी में दाखिला लेने के इच्छुक याचिकाकर्ता ने डिवीजन बेंच के सामने डिप्रिवेशन प्वाइंट व्यवस्था का विरोध किया।

उनका तर्क था कि यह व्यवस्था उम्मीदवारों को CUET में मिले वास्तविक अंकों को प्रभावित करती है और प्रतियोगी परीक्षा के अंकों की अहमियत को कम करती है।

हालांकि, डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता की याचिका दायर करने की पात्रता (locus) और चुनौती के समय को लेकर भी सवाल उठाए।

याचिका कब दायर हुई थी?

बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि याचिका 1 जुलाई को दायर की गई थी, जबकि एकल न्यायाधीश के सामने इसे पहली बार 14 अगस्त को सुनवाई के लिए लिया गया।

बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को चुनौती दिए गए प्रावधान के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत आधार स्थापित करना होगा। मामले से जुड़े मूल कानूनी सवालों की जांच अब एकल पीठ के स्तर पर होगी।
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क्या डिप्रिवेशन प्वाइंट व्यवस्था को हाईकोर्ट ने सही मान लिया है?

नहीं। डिवीजन बेंच ने डिप्रिवेशन प्वाइंट व्यवस्था की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। उसने फिलहाल जेएनयू को दाखिले जारी रखने की अनुमति दी है।

अंतिम स्थिति लंबित रिट याचिका पर आने वाले फैसले से तय होगी। यानी अभी जेएनयू डिप्रिवेशन प्वाइंट के आधार पर दाखिले कर सकता है, लेकिन ये दाखिले अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे। इसलिए मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया अब एकल न्यायाधीश के सामने जारी रहेगी।
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