प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में होगी आसानी
लैपटॉप प्रदान करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यह गर्व की बात है कि ये छात्राएं ऐसे छोटे-छोटे गांवों और कस्बों से आती हैं, जहां से अब प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा, "यह दिवाली का समय है, और इस शुभ अवसर पर मेधावी छात्राओं के लिए शिक्षा को सुगम बनाने का इससे बेहतर उपहार नहीं हो सकता। जैसे हम 'ईज ऑफ बिजनेस' और 'ईज ऑफ लिविंग' की बात करते हैं, वैसे ही यह 'ईज ऑफ एजुकेशन' और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आसानी की पहल है।"
डॉ. सिंह ने कहा कि आज के छात्र अब माता-पिता की पसंद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपनी रुचियों और योग्यता के अनुसार विषय चुनने की आजादी रखते हैं। उन्होंने इसे भारत की शिक्षा प्रणाली में एक प्रगतिशील बदलाव बताया, जहां युवा अब अपनी आकांक्षाओं और जुनून के आधार पर करियर चुन रहे हैं।
महिलाओं की भूमिका पर डाला प्रकाश
उन्होंने कहा, "आज देश में अवसरों और आकांक्षाओं का वास्तविक लोकतंत्रीकरण हुआ है।" मंत्री ने बताया कि छात्र-युवा संबंधी मंत्रालयों में अपने अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने यह नई परंपरा शुरू की है, ताकि प्रतिभाशाली छात्राओं को प्रोत्साहन मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में देश में करीब 1.75 लाख स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं, जिनमें से 50 से 60 हजार महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने कहा, "सिविल सेवा परीक्षा में भी इस साल की तीनों ऑल इंडिया टॉपर लड़कियां ही हैं, जबकि 2022 में 11वीं ऑल इंडिया रैंक पूंछ डिग्री कॉलेज की छात्रा ने हासिल की थी।"
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि अंतरिक्ष मिशनों जैसे आदित्य-एल1 और चंद्रयान-3 में भी महिलाओं की अग्रणी भूमिका रही है। अंत में उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे तकनीक का उपयोग न केवल अपनी पढ़ाई के लिए करें बल्कि समाज के विकास के लिए भी उसका लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार ने समाज के हर वर्ग और हर लिंग के छात्रों के लिए अवसरों के लोकतंत्रीकरण को सुनिश्चित किया है।