झारखंड में 21 सितंबर से सरकारी स्कूलों को फिर से खोलने की योजना बन रही है। सूबे का शिक्षा और साक्षरता विभाग कक्षा नौ से लेकर बारहवीं तक के छात्रों के लिए 21 सितंबर से सरकारी स्कूलों को फिर से खोलने की योजना बना रहा है। ताकि छात्र अपने शैक्षणिक संदेहों को दूर करने के लिए शिक्षकों से परामर्श कर सकें। अधिकारियों का कहना है कि अगर इस योजना को अंजाम दिया जाता है, तो इच्छुक छात्र अपने माता-पिता या अभिभावकों से लिखित सहमति लेने के बाद ही स्कूल आ सकते हैं।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने माध्यमिक शिक्षा विंग द्वारा अनुमोदित किए जाने के लिए एक मसौदा प्रस्ताव तैयार किया, जिसे राज्य आपदा प्रबंधन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। जेईपीसी के अधिकारियों ने दावा किया कि मसौदा प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा विंग को सौंप दिया गया है। हालांकि, माध्यमिक शिक्षा निदेशक का कहना है कि उन्हें जेईपीसी से अभी तक मसौदा प्रस्ताव नहीं मिला है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक जटाशंकर चौधरी का कहना है कि भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई छात्र शैक्षिक संदेह के लिए शिक्षक से परामर्श करना चाहता है, तो वह अभिभावकों से सहमति प्राप्त करने के बाद स्कूल का दौरा कर सकता है। स्कूल छात्रों को नहीं बुलाएगा। सूबे के शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 24 से 31 अगस्त के बीच 9 वीं से 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने के संबंध में एक सर्वेक्षण के माध्यम से माता-पिता से प्रतिक्रिया मांगी थी। जिसमें 25.76 फीसदी अभिभावकों का कहना था कि सितंबर में स्कूल फिर से खुलें, वहीं 31.74 फीसदी अभिभावकों का कहना था कि कोविड-19 वैक्सीन के आने के बाद ही स्कूलो को फिर से खोला जाए। गौरतलब है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सभी स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान बंद हैं।