फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jharkhand: नदी तैरकर स्कूल जा रही हैं झारखंड की बेटियां; पुल गिरा, फिर भी नहीं टूटा पढ़ाई का हौसला

Mon, 14 Jul 2025 08:30 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Jharkhand: झारखंड के खूंटी जिले में पुल गिरने से 12 गांवों का संपर्क टूटा। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा सुनीता होरो अब स्कूल जाने के लिए नदी तैरकर जाती है। प्रशासन ने वैकल्पिक रास्ते का निर्माण शुरू किया है, लेकिन बारिश से काम बाधित है।
 
विज्ञापन
छात्राएं (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : फ्रीपिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Jharkhand: कहते हैं कि हौसले अगर बुलंद हो तो इंसान हर मुश्किल को पार कर जाता है। ऐसी ही मिसाल आजकल झारखंड में देखने को मिल रही है, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं नदी पार करके स्कूल में पढ़ने जा रहे हैं। झारखंड के खूंटी जिले की 15 वर्षीय छात्रा सुनीता होरो (बदला हुआ नाम) अगले साल बोर्ड परीक्षा देने वाली है। लेकिन स्कूल पहुंचने की राह अब उसके लिए आसान नहीं रही। गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला एकमात्र पुल 19 जून को भारी बारिश के चलते टूट गया। अब सुनीता को स्कूल पहुंचने के लिए बनई नदी का एक हिस्सा तैरकर पार करना पड़ता है।

विज्ञापन

एक जोड़ी कपड़े साथ लेकर जाती हूं: छात्रा

सुनीता बताती है, "शुरुआत में गांववालों ने एक बांस की सीढ़ी लगाकर पुल के टूटे हिस्से को जोड़ा था। लेकिन प्रशासन ने इसे खतरनाक बताकर हटवा दिया। अब हफ्ते में एक-दो बार ही स्कूल जा पाती हूं। तैरते वक्त स्कूल बैग को सिर के ऊपर रखती हूं और एक जोड़ी अतिरिक्त कपड़े साथ लेकर जाती हूं क्योंकि कपड़े पूरी तरह भीग जाते हैं।"

सरकारी हाई स्कूल, पेलोल की यह छात्रा अकेली नहीं है। अंघरबारी गांव के कई छात्र-छात्राएं, जो बोर्ड परीक्षा की तैयारी में लगे हैं, अब इसी जोखिम भरे रास्ते से स्कूल जाते हैं। सुनीता की एक सहपाठी रीता प्रधान (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "हममें से ज्यादातर बच्चे गीले कपड़ों में घर लौटते हैं, जिससे अगले दिन स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।"

12 गांवों का टूटा संपर्क

साल 2007 में करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल रांची-खूंटी-सिमडेगा मार्ग के पेलोल गांव के पास स्थित था। लेकिन भारी बारिश के कारण अप्रोच रोड को सहारा देने वाला एक खंभा झुक गया, जिससे पुल का एक हिस्सा ढह गया। इस पुल के टूटने से न सिर्फ सरकारी और मिशनरी स्कूल के सैकड़ों छात्रों को परेशानी हो रही है, बल्कि 12 गांवों का मुख्यालय खूंटी और रांची से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

वैकल्पिक रास्ते पर काम जारी, लेकिन बारिश बनी बाधा

खूंटी की सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) दीपेश कुमारी ने बताया कि पुल के पास एक वैकल्पिक मार्ग बनाने का काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन लगातार बारिश से काम में दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल ट्रैफिक को एक अस्थायी रास्ते से डायवर्ट किया जा रहा है।
विज्ञापन

पहले लगते थे 5 मिनट अब लगते हैं 40 मिनट 

छात्रों का कहना है कि जहां पहले स्कूल पहुंचने में 5 मिनट लगते थे, अब 12 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता है, जिससे 40 मिनट का समय लगता है और खर्च भी बढ़ गया है। राज्य के मुख्यमंत्री ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। एसडीओ के अनुसार, विभागीय जांच समिति गठित कर दी गई है जो पुल गिरने के कारणों की जांच कर रही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें