ये 30 छात्र इंजीनियरिंग एंट्रेंस परीक्षा (जेईई मेन) दे रहे थे, जो राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs) में प्रवेश के लिए होती है। उनके माता-पिता अब इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं और उनका कहना है कि इस घटना का उनके बच्चों के भविष्य पर दीर्घकालिक असर हो सकता है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने एक प्रेस रिलीज में अधिकारियों पर परीक्षा के समय ट्रैफिक प्रबंधन में कमी का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि छात्रों को कोई गलती न होते हुए भी परीक्षा का अवसर चूकना पड़ा। विपक्षी पार्टी YSR कांग्रेस के प्रवक्ता, कार्तिक येलाप्रगड़ा ने कहा कि राज्य को "बेहतर विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री" की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "अभिनेता-राजनेता, अपने फिल्मी इमेज के अनुसार, सार्वजनिक कार्यालय को एक प्रेस रिलीज इवेंट की तरह मानते हैं... हमें अब फिल्मी क्षणों की ताली बजाना बंद करना चाहिए और वास्तविक जिम्मेदारी की मांग करनी चाहिए।"
विशाखापट्टनम पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि छात्रों को 7 बजे तक परीक्षा केंद्र पर पहुंचना था और यदि ये 30 छात्र समय पर पहुंचते तो ट्रैफिक के कारण उन्हें रुकने का सवाल ही नहीं उठता। पुलिस ने पोस्ट में लिखा, "उक्त परीक्षा के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार को 07:00 बजे रिपोर्ट करना था और परीक्षा केंद्र का गेट 8:30 बजे बंद कर दिया जाएगा।" पुलिस ने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री का काफिला 8:41 बजे उस जंक्शन से गुजरा था।