क्या एक दिन की परीक्षा से तय हो सकती है छात्र की पूरी क्षमता?
उन्होंने कहा,"यह एक गैर-जरूरी पाबंदी हटाने और समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग है। एक निष्पक्ष सिस्टम में छात्रों को उनकी असली क्षमता के आधार पर आंका जाना चाहिए, न कि उन्हें सख्त समय-सीमाओं में बांधा जाना चाहिए। कोशिशों की संख्या से टैलेंट को सीमित न करें। योग्यता को उसके उच्चतम स्तर पर तय होने दें।"
उम्मीदवारों का कहना है कि JEE Advanced में सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि सोचने और समस्या हल करने की क्षमता भी परखी जाती है। कई छात्र लगातार तैयारी करने के बाद अपना बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं और इसके लिए उन्हें एक से ज्यादा साल भी लग सकता है। यह परीक्षा एक ही दिन होती है और काफी दबाव वाली होती है। ऐसे में स्वास्थ्य खराब होने, घबराहट या छोटी गलती से भी प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। छात्रों का मानना है कि केवल दो प्रयासों में उनकी पूरी क्षमता सामने नही आ पाती।
उन्होंने कहा, "सभी छात्र एक ही स्तर की जानकारी, मार्गदर्शन या संसाधनों के साथ शुरुआत नहीं करते हैं। कई छात्र, खासकर ग्रामीण या वंचित पृष्ठभूमि वाले, 12वीं कक्षा के बाद ही गंभीरता से तैयारी शुरू करते हैं, जिससे वे पिछड़ जाते हैं।"
उन्होंने तर्क दिया कि कुछ छात्रों को शुरुआती चरण से ही व्यवस्थित तैयारी मिलती है, जबकि अन्य बहुत बाद में शुरू करते हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि तीसरी कोशिश इस अंतर को कम करने में मदद करती है और सभी के लिए समान अवसर पैदा करती है।