फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेईई-एडवांस्ड 2022: गणित के लंबे, भौतिकी के जटिल प्रश्नों से छात्रों के अंक हुए कम

Mon, 12 Sep 2022 06:03 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

जेईई एडवांस्ड के अलावा कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी शामिल हुआ ताकि भविष्य को लेकर राह बंद न हों। परिणाम देखकर बेहद उत्साहित हूं क्योंकि मेरे सपने सच होने जा रहे हैं। मैंने आठवीं कक्षा से जो आईआईटी में जाने का सपना देखा था, वह अब पूरा होगा।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जेईई-एडवांस्ड 2022 के परिणाम में पास प्रतिशत और योग्यता अंकों में कमी की वजह पेपर का कठिन और लंबा होना रहा। जेईई-एडवांस्ड से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि गणित का पेपर लंबा था तो भौतिक के ट्रिकी प्रश्नों में छात्र उलझ गए थे। रसायन विषय का एक पेपर सही था लेकिन दूसरा मुश्किल था। इसी वजह से शीर्ष स्थान पर रहे आरके शिशिर के भी 314 अंक आए। इसी तरह से अन्य छात्रों को कम अंक मिले।

विज्ञापन


वर्ष 2020 और 2021 में कॉमन रैंक लिस्ट या सीआरएल के लिए कटऑफ प्रत्येक विषय में पांच प्रतिशत और कुल मिलाकर 17.5 प्रतिशत थी। इस बार एक अभ्यर्थी को प्रत्येक विषय (भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित) में 4.40 प्रतिशत और कुल मिलाकर 15.28 प्रतिशत अंक हासिल करने थे।

इसके अलावा उम्मीदवारों को रैंक सूची में शामिल होने के लिए विषयवार और कुल योग्यता अंक दोनों को पूरा करना होगा। 2019 में, योग्यता कटऑफ अंक प्रत्येक विषय में 10 प्रतिशत और कुल मिलाकर 25 प्रतिशत थे। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी दिए गए वर्ष में कटऑफ में गिरावट का कारण आमतौर पर कठिन प्रश्न पत्रों होते हैं।
विज्ञापन


कभी नहीं सोचा था टॉप करूंगा : शिशिर
जेईई-एडवांस्ड में टॉप करने वाले बंगलूरू निवासी आरके शिशिर का कहना है कि मैंने आठवीं कक्षा से ही आईआईटी में अपनी उच्च शिक्षा की पढ़ाई का सपना देखा था। कठिन परिश्रम और कंप्यूटर प्रेम के चलते यह सपना अब पूरा हो रहा है। उनका कहना है कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि देशभर में टॉप करूंगा। अब आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक करना है। मेरा उद्यमी बनकर देश और समाज की सेवा में सहयोग करने का सपना है।

उनका कहना है कि जेईई एडवांस्ड के अलावा कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी शामिल हुआ ताकि भविष्य को लेकर राह बंद न हों। परिणाम देखकर बेहद उत्साहित हूं क्योंकि मेरे सपने सच होने जा रहे हैं। मैंने आठवीं कक्षा से जो आईआईटी में जाने का सपना देखा था, वह अब पूरा होगा। शिशिर अपनी सफलता पर कहते हैं कि कठिन परिश्रम, लगन और सपने को पूरा करने का जज्बा जीत देता है। मैं अपनी 11वीं और 12वीं कक्षा के दौरान साढ़े छह से शाम आठ बजे तक पढ़ाई करता था।

इस बीच में एक या आधे घंटे का ब्रेक लेता था। इस दौरान मैं अपना खाना और अपनी पढ़ाई में सहयोग के लिए यूट्यूब वीडियो देखता था ताकि परीक्षा में आसानी होगा। पढ़ाई में एकाग्रता के लिए रूबिक्स -क्यूब को हल करना सबसे अधिक पसंद था। इससे उनके सोचने के कौशल में वृद्धि हुई है। वे 20 मिनट में पूरे क्यूब को हल कर देते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें