पूर्व आईआईटी डायरेक्टर प्रो. गौतम बोहरा के मुताबिक, सरकार का फैसला सही है, क्योंकि एक-एक सीट महत्वपूर्ण होती है। सीट खाली रहने से छात्रों को नुकसान होता। हालांकि यह परंपरा न बनें, इसके तहत कटऑफ क्राइटिरिया पर आईआईटी को कुछ नियम बनाने होंगे, ताकि दोबारा रिजल्ट जारी होने के बाद एक्सटेंडेड कटऑफ लिस्ट निकालने की जरूरत न पड़ें।
वहीं, आईआईटी के पूर्व डायरेक्टर प्रो. संजय धांढे ने कहा कि यह फैसला बेशक आईआईटी के लिए चौंकाने वाला है, लेकिन एससी व एसटी छात्रों की क्वालिफाइड लिस्ट में कमी के चलते लिया गया होगा। सरकार एससी व एसटी छात्रों को बराबरी का दर्जा देती है, ऐसे में उनकी सीट खाली रहने से गलत संदेश जाता। इसे गलत फैसले की बजाय स्वागत करना चाहिए कि कोई सीट खाली न रहे।