विधेयक को बताया "असंवैधानिक और सांप्रदायिक"
कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विरोध स्थल पर पुलिस तैनात की गई थी, हालांकि हिंसा की कोई घटना नहीं हुई। एक बयान में, AISA ने विधेयक की निंदा करते हुए इसे "असंवैधानिक और सांप्रदायिक" बताया और छात्र असंतोष को दबाने के प्रयास के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की आलोचना की।
बयान में कहा गया है, "तानाशाही का प्रदर्शन करते हुए, जामिया प्रशासन ने परिसर को बंद कर दिया, सभी गेट बंद कर दिए और छात्रों को अंदर और बाहर जाने से रोक दिया। जब छात्रों ने सवाल उठाया और गेट पर बड़ी संख्या में एकत्र हुए, तो प्रशासन को दबाव में झुकना पड़ा और गेट खोलने पड़े।"
विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने विधेयक के खिलाफ भाषण दिए और सरकार पर वक्फ संपत्तियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। विरोध के तौर पर उन्होंने विधेयक की प्रतियां जलाईं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कैंपस अधिकारियों ने गार्डों को लगातार सीटी बजाने का निर्देश देकर उनके प्रदर्शन को बाधित करने की कोशिश की, जिसे उन्होंने "छात्रों की आवाज दबाने की हताश कोशिश" करार दिया। इसके बावजूद, छात्रों ने अपना प्रतिरोध जारी रखने की कसम खाई।
AISA के बयान में कहा गया, "सांप्रदायिक और असंवैधानिक विधेयक के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी - पहले से कहीं ज्याद जोरदार, मज़बूत और एकजुट होकर।"