पत्नी की मौत के बाद जीवन शून्यता से भर गया था
अग्रवाल का कहना है कि 2020 में पत्नी के निधन के बाद उनका जीवन शून्यता से भर गया था। बच्चे और पोते-पोतियां साथ थे, लेकिन मन नहीं लगता था। बच्चों की सलाह पर उन्होंने भगवद गीता पढ़ना शुरू किया और यहीं से उन्हें फिर से पढ़ाई में रुचि हुई।
जब उन्होंने पीएचडी करने की इच्छा जताई, तो बच्चों ने उन्हें सीए करने की सलाह दी। बच्चों ने कहा कि यह कठिन है लेकिन इससे पहचान मिलेगी। पोती ने कहा, "अगर आप मुझे गाइड कर सकते हैं, तो खुद क्यों नहीं कर सकते?"
इसके बाद जुलाई 2021 में उन्होंने सीए में पंजीकरण कराया। मई 2022 में फाउंडेशन, जनवरी 2023 में इंटरमीडिएट पास किया और मई 2024 में फाइनल में असफल रहने के बाद इस बार सफलता प्राप्त की।
रोज 10 घंटे करते थे पढ़ाई
उन्होंने प्रतिदिन 10 घंटे तक अध्ययन किया, कंधे के दर्द से जूझे, और लिखने का नियमित अभ्यास किया। न कोचिंग ली, न कोई प्रोफेशनल मदद। किताबें, यूट्यूब वीडियो, और छोटे बेटे की जनरल स्टोर की शांति ही उनका साधन बनी।
ताराचंद ने बताया कि उनके बड़े बेटे ललित दिल्ली में सीए हैं और छोटे बेटे अमित टैक्स प्रैक्टिस में। दोनों ने उनके सफर में हर कदम पर साथ दिया। लैपटॉप दिलवाया, रजिस्ट्रेशन कराया, हर मोड़ पर हौसला बढ़ाया।"
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय उस एक सीख को दिया जो उन्हें उनके चाचा ने दी थी, जिन्होंने उन्हें गीता पढ़ाई थी: “जो भी काम करो, उसे पूरी निष्ठा से करो। उन्होंने कहा, "मैं जो भी काम करता हूं, पूरे मन से करता हूं। यही गीता की शिक्षा है।"