12 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार द्वारा संसद में दिए गए जवाब में बताया गया कि केंद्र की सशक्त विशेषज्ञ समिति (EEC) ने जादवपुर विश्वविद्यालय के संशोधित प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसका कारण विश्वविद्यालय के अनुमानित बजट में भारी कटौती थी, जो पहले 3,299 करोड़ रुपये था और बाद में घटकर 606 करोड़ रुपये रह गया। इस आधार पर समिति ने UGC को जादवपुर विश्वविद्यालय को IoE सूची से हटाने का निर्देश दिया।
JUTA ने गुप्ता को लिखे पत्र में कहा, "कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह फैसला पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आवश्यक राशि प्रदान न कर पाने के कारण लिया गया, जबकि कुछ अन्य का दावा है कि विश्वविद्यालय को 2023 में ही सूची से बाहर कर दिया गया था।"
JUTA ने आगे कहा, "हमें समझ नहीं आ रहा कि दोनों सरकारों के बीच किसी भी तरह के वित्तीय मतभेद के चलते जादवपुर विश्वविद्यालय को उसके प्रतिष्ठित दर्जे से क्यों वंचित किया गया। आपको याद होगा कि विश्वविद्यालय ने बड़ी मुश्किल से UGC को आवेदन शुल्क के रूप में 1 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जो कि प्रोसेसिंग फीस थी। यह धनराशि पूर्व छात्रों, शिक्षकों और शुभचिंतकों की मदद से जुटाई गई थी।"
JUTA के अनुसार, "नियमों के अनुसार, यदि किसी उच्च शिक्षण संस्थान को IoE सूची से हटाया जाता है, तो UGC को आवेदन शुल्क का 75 प्रतिशत (यानी 75 लाख रुपये) लौटाना होता है। हमें जानकारी मिली है कि अब तक यह राशि विश्वविद्यालय को वापस नहीं की गई है।"
JUTA के सचिव पार्थ प्रतिम रॉय ने PTI को बताया, "हम कुलपति से अनुरोध करते हैं कि वह इस मामले को गंभीरता से लें और उचित कार्रवाई करें।"
इस मुद्दे पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया, "जब केंद्र सरकार 1,000 करोड़ रुपये तक देने को तैयार थी, तब राज्य सरकार ने अपनी हिस्सेदारी देने से इनकार कर दिया और विश्वविद्यालय के बजट को 606 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया।"
उन्होंने आगे कहा, "इस स्थिति में विश्वविद्यालय को शेष 25 प्रतिशत धनराशि खुद जुटानी पड़ती, जो व्यावहारिक रूप से असंभव था।"
इस बीच, जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हाल ही में राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उनका वाहन रोका गया और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी कार ने दो छात्रों को घायल कर दिया। इस घटना के बाद प्रदर्शन और उग्र हो गया, जिससे परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी जैसी घटनाएं भी देखने को मिलीं। प्रदर्शनकारी जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।