कई विषय विशेषज्ञ और विदेश में अध्ययन करने के इच्छुक छात्रों का मानना है कि विदेशी विश्वविद्यालय में अध्ययन करना केवल एक अंतरराष्ट्रीय डिग्री हासिल करने से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा "अधिक से अधिक छात्र विदेश इसलिए जाते हैं क्योंकि विदेशों में अध्ययन करने से उन्हें उन देशों में बसने के लिए नौकरी का अवसर मिलता है। जबकि यहां ऐसा नहीं होता है। छात्र रिपुन दास एमोरी यूनिवर्सिटी के गोइज़ुएटा बिजनेस स्कूल में अपनी प्रबंधन की डिग्री हासिल करने के लिए इस साल संयुक्त राज्य अमेरिका गए।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एससी जॉन स्कूल ऑफ बिजनेस में पीएचडी स्कॉलर शरण बनर्जी का मानना है कि इन विदेशी विश्वविद्यालयों का मूल्य अक्सर उस समुदाय में होता है जिसे आप कैंपस में पाते हैं। उन्होंने कहा, " कैंपस स्थापित करने की अनुमति देना उसी सफलता की कहानी को दोहराना नहीं हो सकता है या अन्य बातों के अलावा मूल्य या डिग्री और कठोरता के मामले में कम आकर्षक हो सकता है।"
दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर राजेश झा के अनुसार, हर जगह एक विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर प्रमुख आकर्षण होता है। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा,दूसरी बात, समय के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थान स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में मजबूत जड़ों के साथ विकसित होते हैं।
आईएनटीओ यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप द्वारा हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 10 में से लगभग आठ भारतीय छात्र (76 प्रतिशत) विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपनी अंतरराष्ट्रीय डिग्री पूरी करने के बाद विदेशों में काम करने और बसने की योजना बनाते हैं। इसी तरह, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन पैटर्न पर एक रिपोर्ट ने हाल ही में बताया कि आर्थिक रूप से विकसित देशों में पढ़ने वाले भारतीयों के अपने मेजबान देश में वापस रहने और स्थानीय कार्यबल में शामिल होने वाले सभी विदेशी छात्रों में सबसे अधिक संभावना है।
यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार की हालांकि इस पर अलग राय है। भारतीय छात्र जो विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं,निकट भविष्य में उनकी संख्या दस लाख से अधिक होगी। उन्होंने कहा, "अन्य छात्र जो अप्रवास करने की योजना नहीं बना रहे हैं, वे भारत में एफएचईआई के परिसरों में पढ़ाई करना चुन सकते हैं। इसलिए, छात्रों की दोनों श्रेणियां अपनी पसंद बनाना जारी रखेंगी और मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती है। मसौदा मानदंडों के अनुसार, देश में परिसरों वाले विदेशी विश्वविद्यालय केवल ऑफ़लाइन मोड में पूर्णकालिक कार्यक्रम पेश कर सकते हैं, न कि ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा। विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों (एफएचईआई) को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने के लिए यूजीसी से अनुमति की आवश्यकता होगी।
संसद में केंद्रीय शिक्षा विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 6.5 लाख से अधिक भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश गए। विदेश में पढ़ने के लिए जाने वाले छात्रों की संख्या 2017 में 4.54 लाख से बढ़कर 2019 में 5.86 लाख हो गई। हालांकि, COVID-19 महामारी के कारण, 2020 में यह संख्या आधे से गिरकर 2.59 लाख हो गई। 2021 में उच्च शिक्षा के 4.4 लाख छात्र विदेश गए। इन आंकड़ों से पता चला है कि अधिकांश भारतीय छात्रों ने डिग्री पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए कनाडा, यूएसए और यूके को प्राथमिकता दी।